दतिया उपचुनाव: कैश और शराब बांटने के आरोपों पर घिरे जीतू पटवारी, BJP ने चुनाव आयोग में दर्ज कराई शिकायत

कैश और शराब बांटने के आरोपों पर घिरे जीतू पटवारी

दतिया: मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव से पहले सियासी माहौल गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए उन पर झूठे और भ्रामक आरोप लगाकर मतदाताओं को गुमराह करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने चुनाव आयोग से उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

चुनाव आयोग में दर्ज कराई शिकायत

बीजेपी के चुनाव आयोग समन्वय विभाग के राज्य संयोजक एसएस उप्पल की ओर से दायर शिकायत में कहा गया है कि जीतू पटवारी ने 26 जुलाई को दतिया जिले के डंग करैरा गांव में चुनाव प्रचार के दौरान सार्वजनिक मंच से ऐसे बयान दिए, जो पूरी तरह झूठे, आधारहीन और आपत्तिजनक हैं।

50 करोड़ रुपये और शराब बांटने का लगाया था आरोप

शिकायत के अनुसार, जीतू पटवारी ने दावा किया था कि सत्तारूढ़ दल ने उपचुनाव के लिए 50 करोड़ रुपये नकद की व्यवस्था की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कार्यकर्ताओं को प्रत्येक घर तक ₹5,000 पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।

इतना ही नहीं, पटवारी ने यह भी कहा था कि सरकारी कर्मचारी पुलिस वाहनों और एंबुलेंस का इस्तेमाल कर कथित तौर पर नकदी और शराब को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में मदद कर रहे हैं।

BJP ने आरोपों को बताया झूठा

भारतीय जनता पार्टी ने इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा है कि ऐसे बयान चुनाव के अंतिम चरण में मतदाताओं को भ्रमित करने और चुनावी माहौल खराब करने की कोशिश हैं। पार्टी का आरोप है कि यह आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है और इससे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

चुनाव प्रचार पर रोक लगाने की मांग

बीजेपी ने चुनाव आयोग से मांग की है कि मामले की तत्काल जांच कर जीतू पटवारी के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। साथ ही दतिया विधानसभा क्षेत्र में उनके चुनाव प्रचार पर रोक लगाने की भी मांग की गई है, ताकि मतदान निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराया जा सके।

30 जुलाई को होगा मतदान

दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान होना है। मतदान से ठीक पहले दोनों प्रमुख दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जिससे राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। अब इस मामले में चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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