नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी और जाली मेडिकल डिग्री के मुद्दे पर दायर एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज करते हुए याचिकाकर्ता अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि वह हर हफ्ते जनहित याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं और अखबारों में खबर देखते ही याचिका तैयार कर देते हैं। अदालत ने ऐसी याचिकाओं के जरिए प्रचार पाने की कोशिश पर भी सवाल उठाया।
फर्जी मेडिकल डिग्री की जांच की मांग
नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर डॉक्टरों की मेडिकल डिग्री और मेडिकल रजिस्ट्रेशन की अनिवार्य जांच के लिए एक विश्वसनीय व्यवस्था बनाने की मांग की थी। याचिका में फर्जी या जाली डिग्री रखने वाले लोगों के डॉक्टर के तौर पर प्रैक्टिस करने पर रोक लगाने के लिए मेडिकल नियमों की ऑडिटिंग और एक विशेषज्ञ समिति गठित करने की मांग भी की गई थी।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के बार-बार PIL दाखिल करने पर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि वह हर हफ्ते एक नई रिट याचिका दाखिल कर रहे हैं और किसी खबर को देखकर तुरंत याचिका तैयार कर देते हैं।
अदालत ने यह भी पूछा कि क्या ऐसी याचिकाएं प्रचार या लोकप्रियता हासिल करने के लिए दाखिल की जा रही हैं।
‘आपने इसे फैक्ट्री बना दिया है’
सुनवाई के दौरान जस्टिस नरसिम्हा ने कहा, “आप हर हफ्ते एक PIL दाखिल करते हैं। आपने इसे एक फैक्ट्री बना दिया है। हर हफ्ते आप रिट याचिका दाखिल करते हैं। खबर देखते ही आप ड्राफ्ट तैयार कर लेते हैं। अपनी मांगों को देखिए, क्या आप कभी अपना दिमाग भी लगाते हैं?”
कोर्ट ने याचिकाकर्ता को ऐसी याचिकाओं के जरिए अदालत पर अनावश्यक बोझ नहीं डालने की हिदायत भी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका की खारिज
याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने मेडिकल डिग्री और रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति बनाने समेत कई मांगें रखीं। हालांकि, पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया। मामले का विवरण नरेंद्र कुमार गोस्वामी बनाम भारत संघ, W.P. (C) No. 849/2026 है।