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क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल? बजट सत्र के मुकाबले कैसे बदल गया मानसून सत्र का पूरा गणित

मानसून सत्र 2026 में परिसीमन बिल पास करने के लिए NDA को दो-तिहाई बहुमत की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। अप्रैल से बदलते राजनीतिक समीकरण और कुछ क्षेत्रीय दलों के संभावित समर्थन ने बिल की सफलता पर नई बहस शुरू कर दी है।
संविधान (131वां संशोधन) विधेयक
क्या इस बार पास होगा परिसीमन बिल?

Monsoon Session 2026: 20 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र में केंद्र सरकार एक बार फिर संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 यानी परिसीमन बिल को पारित कराने की कोशिश कर सकती है। अप्रैल 2026 के बजट सत्र में यह विधेयक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण गिर गया था। हालांकि, पिछले तीन महीनों में संसद का राजनीतिक समीकरण काफी बदल चुका है। विपक्षी दलों में टूट, नए राजनीतिक समीकरण और कुछ क्षेत्रीय दलों के संभावित समर्थन ने इस बिल को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार एनडीए आवश्यक बहुमत हासिल कर पाएगा?

क्या है 131वां संविधान संशोधन विधेयक?

131वां संविधान संशोधन विधेयक दो बड़े बदलावों का प्रस्ताव करता है। पहला, लोकसभा की सीटों की संख्या मौजूदा 543 से बढ़ाकर 850 तक करने का प्रावधान। दूसरा, महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को परिसीमन के बाद लागू करने के लिए संवैधानिक आधार तैयार करना।

प्रस्तावित परिसीमन के तहत राज्यों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में लोकसभा सीटें आवंटित की जाएंगी। यही इस विधेयक का सबसे विवादित पहलू भी है। दक्षिण भारत के कई राज्यों—विशेषकर तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश—को आशंका है कि जनसंख्या आधारित परिसीमन से उनकी राजनीतिक हिस्सेदारी कम हो सकती है, जबकि जनसंख्या नियंत्रण में पीछे रहे राज्यों को अधिक प्रतिनिधित्व मिलेगा।

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अप्रैल 2026 में क्यों गिर गया था बिल?

17 अप्रैल 2026 को लोकसभा में इस विधेयक पर मतदान हुआ था। उस समय 528 सांसदों ने मतदान में हिस्सा लिया। संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 352 वोट था।

सरकार के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया। इस तरह सरकार आवश्यक बहुमत से 54 वोट पीछे रह गई और विधेयक पारित नहीं हो सका।

उस समय कांग्रेस, टीएमसी, डीएमके, शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद पवार), समाजवादी पार्टी, आरजेडी और वाम दलों ने मिलकर सरकार का विरोध किया था।

तीन महीनों में कैसे बदल गया संसद का गणित?

अप्रैल से जुलाई के बीच राजनीतिक घटनाक्रम ने लोकसभा की तस्वीर काफी बदल दी है। विपक्ष के कई सांसद सत्ता पक्ष के समर्थन में आ गए हैं, जिससे एनडीए की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

बताया जा रहा है कि:

  • टीएमसी के 20 सांसदों ने अलग होकर एनडीए को समर्थन दिया।
  • शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए।
  • आम आदमी पार्टी के 7 सांसद भी सत्ता पक्ष के साथ आ गए।

इन घटनाक्रमों के बाद लोकसभा में एनडीए की संख्या 292 से बढ़कर 329 तक पहुंचने का दावा किया जा रहा है। फिलहाल तीन सीटें रिक्त होने के कारण प्रभावी सदन में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 माना जा रहा है। यानी सरकार अभी भी इस आंकड़े से 31 वोट दूर है।

‘मिशन 360’ में किन दलों पर टिकी हैं नजरें?

सरकार की रणनीति अब उन क्षेत्रीय दलों का समर्थन हासिल करने पर केंद्रित है, जो कुछ शर्तों के साथ विधेयक पर सकारात्मक रुख अपना सकते हैं।

DMK का रुख क्या है?

डीएमके ने कांग्रेस से दूरी बनाने के संकेत दिए हैं। पार्टी ने कहा है कि वह राज्यहित को प्राथमिकता देगी। माना जा रहा है कि यदि सरकार सभी राज्यों में 50 प्रतिशत सीट वृद्धि की गारंटी देती है, तो डीएमके विधेयक पर सकारात्मक रुख अपना सकती है।

NCP (शरद पवार) की क्या शर्त है?

एनसीपी (एसपी) ने भी संकेत दिया है कि यदि सभी राज्यों में समान रूप से सीटें बढ़ाने का स्पष्ट प्रावधान किया जाता है, तो वह समर्थन पर विचार कर सकती है। हालांकि पार्टी ने अंतिम फैसला विधेयक का मसौदा देखने के बाद लेने की बात कही है।

अन्य क्षेत्रीय दलों की भूमिका

यदि डीएमके और एनसीपी (एसपी) दोनों का समर्थन सरकार को मिल जाता है, तो एनडीए बहुमत के बेहद करीब पहुंच सकती है। इसके बाद बीजेडी, वाईएसआरसीपी जैसे कुछ अन्य दलों का समर्थन सरकार के लिए निर्णायक साबित हो सकता है।

विपक्ष की रणनीति क्या होगी?

विपक्ष की प्राथमिक कोशिश एनडीए को दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से नीचे रोकने की रहेगी। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सरकार से सभी दलों की बैठक बुलाने की मांग की है और कहा है कि संशोधित विधेयक का अध्ययन किए बिना कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता।

विपक्ष का मानना है कि यदि सरकार 360 वोट का आंकड़ा नहीं छू पाती, तो संविधान संशोधन एक बार फिर पारित नहीं हो सकेगा।

मानसून सत्र का अहम कार्यक्रम

  • 19 जुलाई: सर्वदलीय बैठक
  • 20 जुलाई: मानसून सत्र की शुरुआत
  • 21 जुलाई: एनडीए संसदीय दल की बैठक
  • 13 अगस्त: मानसून सत्र का समापन

क्या इस बार पास हो पाएगा परिसीमन बिल?

इस बार की स्थिति अप्रैल 2026 की तुलना में अलग जरूर दिखाई दे रही है। एनडीए पहले के मुकाबले मजबूत हुई है और कुछ क्षेत्रीय दलों के समर्थन की संभावना भी जताई जा रही है। दूसरी ओर विपक्ष पहले जितना एकजुट नजर नहीं आ रहा।

हालांकि संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने के लिए केवल राजनीतिक दावे पर्याप्त नहीं होंगे। अंतिम फैसला संसद में मतदान के दौरान सांसदों की वास्तविक संख्या, दलों के रुख और संभावित समर्थन पर निर्भर करेगा। यदि सरकार आवश्यक दो-तिहाई बहुमत जुटाने में सफल रहती है तो परिसीमन और महिला आरक्षण लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठेगा। वहीं यदि बहुमत का आंकड़ा नहीं जुट पाया, तो यह विधेयक एक बार फिर संसद में अटक सकता है।

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