माला के साथ भाला भी रखो: धीरेंद्र शास्त्री का बड़ा बयान, हिन्दुत्व बचाने के लिए दिया यह संदेश

माला के साथ भाला भी रखो
माला के साथ भाला भी रखो

मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में स्थित बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र शास्त्री एक बार फिर अपने तीखे और बेबाक बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में गढ़ा क्षेत्र में आयोजित 301 कन्याओं के सामूहिक विवाह समारोह के दौरान उन्होंने धर्म और हिन्दुत्व को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। शास्त्री ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ मठ में बैठकर पूजा-पाठ करने या माला जपने से धर्म की रक्षा संभव नहीं है, इसके लिए सक्रियता और साहस दिखाना जरूरी है।

सामूहिक विवाह समारोह को संबोधित करते हुए, बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र शास्त्री ने हिन्दुत्व को बचाने के लिए सीधे और कड़े शब्दों में संदेश दिया। उन्होंने कहा, “अगर हिन्दुत्व को बचाना है तो सिर्फ मठ में बैठकर माला जपने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए मठ से बाहर निकलना पड़ेगा और माला के साथ भाला भी रखना पड़ेगा।”

उन्होंने आगे आत्मरक्षा के विषय पर जोर दिया और कहा कि यह भारत के संविधान द्वारा दिया गया अधिकार है। धर्म सिर्फ आस्था से नहीं बचता, बल्कि सजगता, साहस और मजबूती से बचता है। धीरेंद्र शास्त्री ने खास तौर पर युवाओं और महिलाओं से अपील करते हुए कहा कि:

जूडो, कराटे, तीरंदाजी और तलवारबाजी जैसी आत्मरक्षा की विधाएं हर किसी को सीखनी चाहिए। आत्मरक्षा के कौशल मुश्किल समय में खुद को बचाने के लिए आवश्यक हैं। धर्म को बचाने के लिए समाज को मजबूत और जागरूक बनाना अति आवश्यक है।

गौरतलब है कि यह सामूहिक विवाह कार्यक्रम 13 से 15 फरवरी के बीच संपन्न हुआ, जिसमें नवविवाहित जोड़ों को 30 हजार रुपये की एफडी, सोने की लौंग और बाली, मंगलसूत्र और लगभग ढाई लाख रुपये की आर्थिक मदद भी दी गई ताकि वे अपने नए जीवन की अच्छी शुरुआत कर सकें।

धीरेंद्र शास्त्री का यह ‘माला और भाला’ वाला बयान सामने आते ही तेजी से वायरल हो गया है। जहां एक वर्ग उनके इस संदेश को समाज को जागरूक करने वाला बता रहा है, वहीं कुछ लोग इसे विवादास्पद भी मान रहे हैं। फिलहाल उनका यह बयान चर्चा का मुख्य केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर राजनीतिक व सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

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