उत्तर प्रदेश के एटा जिले से आई यह कहानी दिल को झकझोर देने वाली है। जैथरा क्षेत्र के नगला धीरज गांव में 8 साल के एक मासूम बच्चे को उस समय अकेले संघर्ष करना पड़ा, जब उसे अपनी मृत माँ का पोस्टमॉर्टम करवाने की जिम्मेदारी उठानी पड़ी। इस मार्मिक दृश्य को देखकर पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं।
एटा के पोस्टमार्टम हाउस पर मौजूद लोगों और पुलिसकर्मियों का दिल उस वक्त भर आया, जब उन्होंने मासूम शनि को कफ़न में लिपटी अपनी माँ की लाश के पास बैठे देखा। मासूम लगातार रो रहा था, कभी वह माँ के शव को देखता तो कभी अपने आँसू पोंछता। यह घटना इस बात की भयावह सच्चाई बताती है कि कैसे एक बच्चे के जीवन से पहले उसके रिश्तेदार संपत्ति के लालच में संवेदनहीन हो गए।
मासूम शनि पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक साल पहले उसके पिता की भी HIV (एड्स) संक्रमण के कारण मौत हो गई थी। अब उसकी माँ ने भी उसी बीमारी से ग्रसित होकर दम तोड़ दिया। माता-पिता की मौत के बाद अब घर में सिर्फ इकलौता बेटा शनि ही बचा है। शव को कंधा देने वाला और अंतिम संस्कार में मदद करने वाला कोई नहीं था। लगभग 17 घंटे की देरी के बाद कुछ रिश्तेदार पोस्टमार्टम हाउस पहुँचे। हालांकि, पुलिसकर्मियों ने मानवता दिखाते हुए एक इंस्पेक्टर के नेतृत्व में मृत महिला के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी भी ली।
इस दुख की घड़ी में भी मासूम शनि को परिवार से समर्थन नहीं, बल्कि जान का खतरा मिल रहा है। मासूम बेटे शनि ने पुलिस को अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि उसे अपने ही परिवार के लोगों से जान का खतरा है।
शनि ने आरोप लगाया कि उसके परिवार के सदस्य उसकी 5 बीघा जमीन हड़पना चाहते हैं। उसने बताया कि उसके परिवार वाले उसके माता-पिता को भी पहले धमकाते थे। शनि ने बताया कि परिवार का कोई भी सदस्य उसकी मदद के लिए आगे नहीं आया है, बल्कि सभी उसकी जमीन छीनने की फिराक में हैं।
मासूम शनि ने अपने और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के लिए जैथरा थाना पुलिस से शिकायत भी दर्ज कराई है।
यह दुखद घटना संपत्ति के लालच में टूटते मानवीय रिश्तों की तस्वीर पेश करती है। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है और उम्मीद है कि प्रशासन इस अनाथ मासूम को सुरक्षा और न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा।









