अगर आप भी अपने लीवर को स्वस्थ रखने के लिए लिवर 52 (Liv. 52) पर भरोसा करते हैं, तो यह खबर आपको चौंका सकती है। गाजियाबाद के मुरादनगर में पुलिस ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है जो हिमालय कंपनी की लोकप्रिय दवा लिवर 52 का नकली संस्करण बनाकर धड़ल्ले से बाजार में सप्लाई कर रहा था। यह गिरोह न सिर्फ कंपनी को चूना लगा रहा था, बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खतरनाक खिलवाड़ कर रहा था।
यह पूरा मामला तब सामने आया जब हिमालय कंपनी के कर्मचारियों ने मुरादनगर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उनकी कंपनी की प्रतिष्ठित दवा ‘लीवर 52’ अवैध रूप से बनाई जा रही है और इसे बड़े पैमाने पर बाजार में बेचा जा रहा है।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत कार्रवाई की। मार्केट में बेची जा रही दवाओं के नमूने एकत्र किए गए और दवा विक्रेताओं से गहन पूछताछ की गई। इसी पूछताछ में नकली दवा सप्लाई करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ।
गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में पता चला कि इस गिरोह का संचालन सुनियोजित तरीके से किया जा रहा था। ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में, यह गिरोह कई समय से यह फर्जीवाड़ा कर रहा था:
नकली दवाओं को फर्जी तरीके से हरियाणा में तैयार किया जा रहा था। दवा के रैपर और बॉक्स मेरठ में तैयार किए जाते थे, ताकि वे बिल्कुल असली लगें। ज्यादा मार्जिन होने के कारण ये नकली दवाएं आसानी से बाजार में खपाई जा रही थीं।
गाजियाबाद पुलिस की हाईटेक टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस पूरे गिरोह का भंडाफोड़ किया और चार मुख्य आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया है। ये वे सदस्य थे जो केवल चंद पैसों के लिए लोगों की जान को जोखिम में डाल रहे थे। पुलिस ने इन सभी को सलाखों के पीछे भेज दिया है, वहीं इनके बाकी साथियों की धरपकड़ के लिए भी विशेष टीमों का गठन किया गया है।
यह कार्रवाई दर्शाती है कि कानून के हाथ कितने लंबे होते हैं। लोगों को अपनी सेहत से खिलवाड़ करने वाले ऐसे गिरोहों से बचने के लिए हमेशा विश्वसनीय और प्रमाणित दवा विक्रेताओं से ही दवाएं खरीदनी चाहिए।









