उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद से देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले एक बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। भोजपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है जो फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोगों के पासपोर्ट बनवा रहा था। चौंकाने वाली बात यह है कि जांच में 24 पासपोर्ट आवेदनों में एक ही मोबाइल नंबर और फर्जी पते का इस्तेमाल किया जा रहा था।
गाजियाबाद की भोजपुर पुलिस और ग्रामीण ज़ोन की स्वाट टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए इस बड़े रैकेट का खुलासा किया है। यह जांच 20 दिसंबर 2025 को प्राप्त आदेश के बाद शुरू की गई थी, जिसके बाद बड़े खुलासे हुए हैं।
फर्जीवाड़े का तरीका
पुलिस के अनुसार, यह गिरोह फर्जी तरीके से आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, बैंक पासबुक जैसे कूटरचित दस्तावेज तैयार करता था। ये आरोपी पासपोर्ट आवेदकों के फॉर्म में ग्राम भोजपुर, त्यौड़ी, अतरौली, सैदपुर हुसैनपुर और किछड़ी जैसे गांवों के फर्जी पते दर्शाते थे, जबकि आवेदक वहां के स्थायी निवासी नहीं थे। जांच में अब तक 24 पासपोर्ट आवेदनों में पते गलत पाए गए हैं।
डाककर्मी की संलिप्तता और भ्रष्टाचार
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि गिरोह ने डाक विभाग के एक कर्मचारी को लालच देकर इस साजिश में शामिल किया था। एक डाकघर कर्मचारी ने पूछताछ में बताया कि विवेक गांधी और प्रकाश सुब्बा नामक दो व्यक्तियों ने उसे प्रति पासपोर्ट 2,000 रुपये देने का लालच दिया था। इसके बदले में डाककर्मी को पासपोर्ट पर दर्ज पते पर डिलीवरी देने के बजाय सीधे उन्हें सौंपना था। डाककर्मी ने लालच में आकर फर्जी पते वाले पासपोर्ट की डिलीवरी गलत तरीके से की।
5 आरोपी गिरफ्तार, भारी मात्रा में बरामदगी
पुलिस ने इस मामले में पाँच आरोपियों— विवेक गांधी, प्रकाश सुब्बा, अरुण कुमार, अमनदीप सिंह उर्फ अजमीत सिंह, और महिला आरोपी सतवंत कौर— को गिरफ्तार किया है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे संगठित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी करते थे।
पुलिस ने इनके कब्जे से निम्नलिखित वस्तुएं बरामद की हैं:
* 04 फर्जी आधार कार्ड
* 02 फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस
* 02 फर्जी बैंक पासबुक
* 02 पासपोर्ट
* 06 मोबाइल फोन
* 02 कारें (ब्रिजा और इको स्पोर्ट)
* 4030 रुपये नकद
इस मामले में एसीपी लिपि नगायच ने जानकारी देते हुए बताया कि एक ही पते पर 24 पासपोर्ट और एक मोबाइल नंबर दर्शाए जाने के बाद टीम गठित की गई थी। उन्होंने बताया कि पाँच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। एसीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछली पुलिस वेरिफिकेशन में हुई किसी भी तरह की लापरवाही की भी गहन जांच की जा रही है।
पुलिस ने फर्जीवाड़े और षड्यंत्र के आरोप में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज बनवाना देश की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है, जिसके चलते पुलिस इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।









