ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को ऊर्जा संकट की ओर धकेल दिया है। हालात ऐसे बन रहे हैं कि आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर बड़े स्तर पर नियंत्रण लागू किया जा सकता है। कोरोना काल की तरह एक बार फिर पाबंदियों वाला दौर लौटने की आशंका जताई जा रही है, फर्क सिर्फ इतना होगा कि इस बार वजह महामारी नहीं बल्कि ऊर्जा संकट होगा।
होर्मुज स्ट्रेट पर तनाव, तेल की कीमतों में उछाल
युद्ध के चलते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जो वैश्विक तेल सप्लाई का प्रमुख मार्ग है। हालांकि ईरान ने बयान दिया है कि यह मार्ग अधिकांश देशों के लिए खुला है, लेकिन तनाव के कारण तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसका सीधा असर ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ रहा है, जिससे बाजार में हर चीज महंगी होती जा रही है।
महंगाई और खाद्य सुरक्षा पर भी मंडरा रहा खतरा
तेल की कीमत बढ़ने से सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि खाद्य उत्पादन भी प्रभावित हो रहा है। क्योंकि खाद्य पदार्थ बनाने के लिए जरूरी खाद्य भी इसी मार्ग से जुड़ी होने के कारण महंगा हो रहा है। ऐसे में किसानों की लागत बढ़ेगी और इसका असर सीधे आम लोगों की थाली पर भी पड़ने का संकट बन रहा है। यानी आने वाले समय में खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं।
कई देशों में शुरू हुई फ्यूल राशनिंग
दुनिया के कई देशों ने हालात को देखते हुए तेल की खपत पर नियंत्रण शुरू कर दिया है। जापान में फ्यूल राशनिंग और एनर्जी वाउचर लागू किए गए हैं, वहीं दक्षिण कोरिया में भी राशनिंग चल रही है। बांग्लादेश, फिलीपींस और श्रीलंका में पेट्रोल के लिए लंबी कतारें लग रही हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया ने नागरिकों को गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी है।
भारत में भी लागू हो सकते हैं सख्त नियम
भारत में भी तेल राशनिंग की संभावना जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने “Sheltering from Oil Shocks” नाम से 10 बिंदुओं वाला प्लान जारी किया है, जिसमें सरकारों को कई सख्त कदम उठाने की सलाह दी गई है।
IEA के सुझाए गए संभावित कदम
- गाड़ियों के लिए नंबर प्लेट के आधार पर चलने के दिन तय करना
- हाईवे पर स्पीड लिमिट कम करना
- हवाई यात्रा को सीमित करना
- गैस की जगह इलेक्ट्रिक उपकरणों का उपयोग बढ़ाना
- जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम लागू करना क्या फिर आएगा ‘ऊर्जा लॉकडाउन’?
IEA का कहना है कि जैसे कोरोना के दौरान पाबंदियां असरदार साबित हुई थीं, वैसे ही ऊर्जा संकट में भी ऐसे उपाय लागू किए जा सकते हैं। भले ही इसे “एनर्जी सिक्योरिटी” कहा जाए, लेकिन असर लॉकडाउन जैसा ही हो सकता है। अगर तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो ट्रांसपोर्ट, उड़ानें और खेती महंगी होती जाएंगी। धीरे-धीरे सरकारें राशनिंग, यात्रा नियंत्रण और डिजिटल परमिट जैसे सिस्टम लागू कर सकती हैं, जिससे लोगों की आवाजाही और खपत पर सीधा नियंत्रण होगा।








