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5 साल बाद भी थमा नहीं गोगी गैंग का आतंक, अंकित बालियान हत्याकांड ने दोहराई खूनी पुरानी कहानी, कौन था जितेंद्र मान उर्फ गोगी….।

दिल्ली-एनसीआर के अपराध जगत में एक नाम ऐसा रहा है, जिसकी मौत के बाद भी उसका नेटवर्क लगातार सुर्खियों में आता रहा है। यह नाम है जितेंद्र मान उर्फ गोगी का।
अंकित बालियान हत्याकांड
5 साल पहले मारा गया गोगी, फिर भी कायम गैंग का खौफ!

Jitender Gogi Gang: दिल्ली-एनसीआर के अपराध जगत में एक नाम ऐसा रहा है, जिसकी मौत के बाद भी उसका नेटवर्क लगातार सुर्खियों में आता रहा है। यह नाम है जितेंद्र मान उर्फ गोगी का। गोगी की 2021 में रोहिणी कोर्ट के भीतर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, लेकिन करीब पांच साल बाद एक बार फिर उसके गैंग का नाम एक चर्चित हत्याकांड में सामने आया है।

शामली में 26 अगस्त की शाम हरियाणवी गायक अंकित बालियान की हत्या के मामले में पुलिस ने गोगी गैंग का एंगल सामने रखा है। पुलिस के मुताबिक, हत्या की साजिश पहले से तैयार की गई थी और आरोपियों ने वारदात से पहले अंकित की कई दिनों तक रेकी की थी। इस मामले में दो कथित शूटरों को पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।

कौन था जितेंद्र गोगी?

जितेंद्र मान उर्फ गोगी दिल्ली के अलीपुर इलाके से जुड़ा था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, पढ़ाई छोड़ने के बाद वह प्रॉपर्टी से जुड़े काम में आया, लेकिन पिता की मौत के बाद उसका जीवन धीरे-धीरे अपराध की ओर मुड़ गया। करीब 2010 के आसपास उसने आपराधिक गतिविधियों में कदम रखा और बाद में अपना गैंग खड़ा कर लिया।

समय के साथ गोगी का नेटवर्क दिल्ली के बाहरी इलाकों से निकलकर हरियाणा के कुछ हिस्सों तक पहुंच गया। उसके खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, रंगदारी, लूट, डकैती, कारजैकिंग, अवैध हथियार और जमीन से जुड़े अपराधों के कई मामले दर्ज हुए। पुलिस ने उस पर MCOCA के तहत भी कार्रवाई की थी।

महंगी गाड़ियों और हथियारों के लिए भी चर्चा में था गैंग

गोगी गैंग पर रंगदारी वसूली, जमीन पर कब्जे की कोशिश और विरोध करने वालों को धमकाने जैसे आरोप लगते रहे। पुलिस जांच में गैंग के सदस्यों के पास महंगी गाड़ियों और आधुनिक हथियारों की मौजूदगी की बात भी सामने आती रही।

आरोप था कि आपराधिक गतिविधियों से हासिल रकम का इस्तेमाल गैंग के नेटवर्क को मजबूत करने में किया जाता था। जैसे-जैसे गोगी का प्रभाव बढ़ा, उसके साथ बड़ी संख्या में अपराधी जुड़ते गए और दिल्ली-हरियाणा में उसका नाम खौफ के साथ लिया जाने लगा।

कभी दोस्त थे गोगी और टिल्लू, फिर बन गए जानी दुश्मन

गोगी की कहानी में टिल्लू ताजपुरिया का नाम सबसे अहम है। दोनों की पहचान उस समय की है, जब वे दिल्ली विश्वविद्यालय के स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज में पढ़ते थे। दोनों बाहरी दिल्ली के इलाकों से आते थे और कभी एक-दूसरे के करीबी माने जाते थे।

कॉलेज छात्रसंघ चुनाव के दौरान दोनों अलग-अलग पक्षों के साथ खड़े हुए और यहीं से उनके बीच विवाद की शुरुआत हुई। देखते ही देखते व्यक्तिगत मतभेद इलाके और वर्चस्व की लड़ाई में बदल गए।

इसके बाद दोनों अलग-अलग गैंग के साथ आगे बढ़े और दिल्ली में एक लंबी गैंगवार शुरू हुई। पुलिस के मुताबिक, इस दुश्मनी में दोनों पक्षों से जुड़े कई लोगों की जान गई और वर्षों तक बदले का सिलसिला चलता रहा।

जेल से भी गैंग चलाने का लगा था आरोप

गोगी को पकड़ना दिल्ली पुलिस के लिए लंबे समय तक चुनौती बना रहा। 2016 में गिरफ्तारी के बाद उसके फरार होने की बात भी सामने आई थी। आखिरकार दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मार्च 2020 में उसे गिरफ्तार कर लिया।

लेकिन गिरफ्तारी के बाद भी पुलिस का आरोप था कि गोगी जेल के भीतर से अपने नेटवर्क को प्रभावित कर रहा था। यानी गोगी की चुनौती सिर्फ उसके बाहर रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसके जेल जाने के बाद भी उसका नेटवर्क सक्रिय रहा।

रोहिणी कोर्ट में खत्म हुई गोगी की कहानी

24 सितंबर 2021 को गोगी को दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में सुनवाई के लिए लाया गया था। इसी दौरान वकीलों की ड्रेस में आए दो हथियारबंद हमलावरों ने कोर्ट परिसर के भीतर उस पर फायरिंग कर दी।

गोगी को कई गोलियां लगीं और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई करते हुए दोनों हमलावरों को भी मार गिराया। बाद की जांच में इन हमलावरों का संबंध टिल्लू ताजपुरिया गैंग से बताया गया।

इस घटना ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए थे, क्योंकि राजधानी की एक अदालत के भीतर ही गैंगवार की यह सनसनीखेज घटना हुई थी।

गोगी की मौत के बाद भी नहीं खत्म हुआ गैंग

गोगी की मौत के साथ उसके गैंग का अंत नहीं हुआ। उसके कई सहयोगी और करीबी अपराधी उसके नेटवर्क को आगे बढ़ाते रहे। बाद के वर्षों में गोगी गैंग से जुड़े कई नाम पुलिस रिकॉर्ड और आपराधिक मामलों में सामने आते रहे।

यही वजह है कि गोगी की मौत के वर्षों बाद भी उसके नाम से जुड़ा नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर और आसपास के इलाकों में पुलिस के लिए चिंता का विषय बना रहा।

टिल्लू भी नहीं बचा, तिहाड़ में हुई हत्या

गोगी की हत्या के करीब 20 महीने बाद उसके सबसे बड़े दुश्मन टिल्लू ताजपुरिया की भी हत्या कर दी गई। 2 मई 2023 को तिहाड़ जेल में टिल्लू पर हमला हुआ और उसकी मौत हो गई। इस हत्या में गोगी गैंग से जुड़े लोगों पर आरोप लगाए गए।

यानी दोनों गैंग के सबसे बड़े चेहरे मारे जा चुके हैं, लेकिन उनके नाम से जुड़े नेटवर्क और पुरानी दुश्मनी का असर पूरी तरह खत्म नहीं हुआ।

अंकित बालियान हत्याकांड में फिर सामने आया गोगी गैंग

अब शामली में हरियाणवी गायक अंकित बालियान की हत्या ने गोगी गैंग को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। पुलिस के मुताबिक, अंकित की हत्या की साजिश पहले से तैयार की गई थी और वारदात को अंजाम देने से पहले उनकी कई दिनों तक रेकी की गई।

जांच में पुलिस को गोगी गैंग से जुड़े नेटवर्क का एंगल मिला है। पुलिस का कहना है कि शूटरों को बाहर से हथियार उपलब्ध कराए गए थे और हत्या की पूरी प्लानिंग के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

जेल में बैठकर बनी साजिश?

अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में यह बात भी सामने आई है कि हत्या की प्लानिंग कथित तौर पर जेल से की गई। फिलहाल गोगी गैंग के नेटवर्क में दीपक बॉक्सर का नाम सामने आ रहा है। वह तिहाड़ जेल में बंद है और उसे विदेश से भारत लाया गया था।

हालांकि अंकित हत्याकांड में दीपक बॉक्सर की सीधी भूमिका है या नहीं, इसकी जांच अभी जारी है। पुलिस फरार आरोपियों और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

गोगी की मौत के 5 साल बाद भी क्यों जिंदा है उसका नेटवर्क?

गोगी की कहानी सिर्फ एक गैंगस्टर की कहानी नहीं है, बल्कि यह बताती है कि किसी संगठित आपराधिक नेटवर्क का असर उसके मुखिया की मौत के बाद भी खत्म होना आसान नहीं होता।

गोगी और टिल्लू दोनों अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके नाम से जुड़े गैंग, पुराने सहयोगी और आपराधिक नेटवर्क समय-समय पर नए मामलों में सामने आते रहे हैं। अंकित बालियान हत्याकांड में गोगी गैंग का नाम सामने आना इसी लंबी कहानी की एक नई कड़ी माना जा रहा है।

अब पुलिस की जांच का सबसे अहम सवाल यही है कि अंकित बालियान की हत्या की साजिश किसने रची, जेल से इसे किसने निर्देशित किया और इस नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं। आने वाले दिनों में गिरफ्तारियों और जांच से इस पूरे मामले की तस्वीर और साफ हो सकती है।

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