भारत ने इलेक्ट्रॉनिक निर्माण में मारी लंबी छलांग, वैश्विक स्तर पर बना पांचवां सबसे बड़ा देश

इलेक्ट्रॉनिक सामानों के निर्माण में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। देश अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक निर्माता बन गया है।

नई दिल्ली: मोबाइल फोन से लेकर दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामानों के निर्माण में भारत तेजी से अपनी जगह मजबूत कर रहा है। डिजिटल हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग क्षमता के मामले में भारत दुनिया में 5वें नंबर पर पहुंच गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक डिजिटल हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में भारत की हिस्सेदारी करीब 3.8 फीसदी है। चीन 58.8 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे आगे है, जबकि ताइवान, दक्षिण कोरिया और जापान भी भारत से ऊपर हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के विस्तार का असर रोजगार पर भी पड़ा है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले एक दशक में भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने करीब 25 लाख रोजगार के अवसर पैदा किए हैं।

चीन सबसे आगे, भारत 5वें स्थान पर

दुनिया के डिजिटल हार्डवेयर मैन्युफैक्चरिंग में चीन का दबदबा बना हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार चीन की हिस्सेदारी 58.8 फीसदी है। इसके बाद ताइवान की 10.2 फीसदी, दक्षिण कोरिया की 6.7 फीसदी और जापान की 4.8 फीसदी हिस्सेदारी है।

इन चार देशों की कुल हिस्सेदारी करीब 80.5 फीसदी बैठती है। भारत की हिस्सेदारी करीब 3.8 फीसदी है और वह पांचवें स्थान पर है।

10 साल में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन में बड़ा उछाल

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स का उत्पादन पिछले एक दशक में तेजी से बढ़ा है। नीति आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, देश में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 2014-15 में करीब 1.9 लाख करोड़ रुपये था, जो 2024-25 में बढ़कर लगभग 11.3 लाख करोड़ रुपये हो गया।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर का देश की GDP में करीब 3.4 फीसदी योगदान है। इस दौरान मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग ने सेक्टर की ग्रोथ में अहम भूमिका निभाई है।

इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में कितने लोगों को मिला रोजगार?

नीति आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़ी सप्लाई चेन में करीब 1.2 लाख सीधे और 2.5 लाख से ज्यादा अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें करीब 70 फीसदी कर्मचारी 19 से 24 साल की महिलाएं हैं।

वहीं, केंद्र सरकार के मुताबिक पिछले करीब एक दशक में पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में लगभग 25 लाख रोजगार के अवसर बने हैं। ये आंकड़ा सीधे किसी एक योजना से पैदा हुई नौकरियों के बजाय पूरे सेक्टर में बने रोजगार को दर्शाता है।

मोबाइल फोन बना ग्रोथ का बड़ा आधार

भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के विस्तार में मोबाइल फोन का बड़ा योगदान रहा है। भारत अब दुनिया में मोबाइल फोन बनाने वाले प्रमुख देशों में शामिल है।

मोबाइल फोन की असेंबली में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की जरूरत होती है। इसके अलावा अब भारत सिर्फ असेंबली तक सीमित रहने के बजाय मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स की वैल्यू चेन में घटकों, डिजाइन और दूसरे मैन्युफैक्चरिंग हिस्सों को भी मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट भी बढ़ा

भारत से इलेक्ट्रॉनिक्स सामान का निर्यात भी पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट करीब 8.6 अरब डॉलर था, जो 2024 में बढ़कर करीब 42 अरब डॉलर हो गया। इसी अवधि में कुल भारतीय निर्यात में इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी भी बढ़ी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2014-15 से 2024-25 के बीच इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट करीब 38,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 3.27 लाख करोड़ रुपये हो गया।

ECMS से और बढ़ेगा रोजगार

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने Electronics Components Manufacturing Scheme (ECMS) शुरू की है। अगस्त 2026 तक इस योजना के तहत कुल 106 प्रोजेक्ट मंजूर किए जा चुके थे। इन परियोजनाओं में करीब 69,548 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है और लगभग 75 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।

इनमें से 38 प्लांट काम करना शुरू कर चुके हैं, जबकि 16 अन्य प्लांट निर्माण के उन्नत चरण में हैं। योजना का उद्देश्य भारत में कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल, PCB, बैटरी सेल और दूसरे जरूरी इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट का घरेलू उत्पादन बढ़ाना है।

सरकार का 2030-31 तक बड़ा लक्ष्य

केंद्र सरकार ने 2030-31 तक भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए ECMS, सेमीकंडक्टर मिशन और PLI जैसी योजनाओं के जरिए घरेलू वैल्यू चेन को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

हालिया सरकारी नीति में सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की असेंबली बढ़ाने के बजाय देश में ज्यादा से ज्यादा वैल्यू एडिशन और कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है। MeitY के मुताबिक, भारत का घरेलू वैल्यू एडिशन पहले के करीब 12-15 फीसदी से बढ़कर लगभग 22-23 फीसदी हो चुका है और आगे इसे 40 फीसदी तक ले जाने का लक्ष्य है।

इस तरह भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर अब केवल मोबाइल असेंबली तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि कंपोनेंट और सप्लाई चेन के ज्यादा हिस्से को देश में विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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