हाल ही में भारत और यूरोपीय यूनियन (EU) के बीच एक ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौता (FTA) हुआ है, जिसे वैश्विक व्यापार जगत ‘मदर ऑफ ऑल ट्रेड डील्स’ कह रहा है। यह समझौता केवल हस्ताक्षर समारोह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया की दूसरी और चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ने वाला एक ऐसा पुल है जो वैश्विक अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला है। आज यह साफ हो चुका है कि भारत को यूरोप के रूप में एक बेहद ताकतवर और भरोसेमंद व्यापारिक साथी मिला है। आइए जानते हैं कि यह डील कितनी बड़ी है और इसका सीधा असर आम भारतीय उपभोक्ता और उद्योगों पर कैसे पड़ेगा।
यह समझौता, जिसमें भारत और यूरोपीय यूनियन के 27 देश शामिल हैं, मिलकर अब 28 देशों की एक मजबूत आर्थिक और रणनीतिक टीम बन चुके हैं। इसकी विशालता इसी बात से समझी जा सकती है कि दोनों पक्ष मिलकर दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं और यह वैश्विक व्यापार के एक-तिहाई हिस्से को कवर करता है। इस समय भारत और यूरोप के बीच लगभग 180 बिलियन यूरो का वार्षिक व्यापार होता है, जो आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ने की संभावना है। दिलचस्प बात यह है कि इस नई साझेदारी का श्रेय अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक टैरिफ नीति को भी दिया जा रहा है, जिसने भारत और यूरोप को एक-दूसरे के और करीब ला दिया।
यह समझौता वर्ष 2027 से लागू होने की संभावना है। इसके लागू होने के बाद भारतीय बाजारों में कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे, खासकर आयातित उत्पादों की कीमतों में।
यूरोप से आयात होने वाली लग्जरी कारों पर वर्तमान में 110 प्रतिशत तक टैक्स लगता है। समझौते के बाद यह टैक्स घटकर लगभग 10 प्रतिशत रह जाएगा (हालांकि यह कोटा-आधारित होगा)। इससे BMW, Mercedes, Audi, Porsche और Lamborghini जैसी महंगी गाड़ियां भारतीय ग्राहकों को कहीं कम कीमत पर मिल सकेंगी।
यूरोप से आने वाली वाइंस पर लगने वाला 150 प्रतिशत तक का टैक्स कम होकर प्रीमियम वाइंस के लिए 20 प्रतिशत और मीडियम रेंज के लिए 30 प्रतिशत रह जाएगा। इसके अलावा, ऑलिव ऑयल जैसे वेजिटेबल ऑयल्स पर लगने वाला 45 प्रतिशत टैक्स पूरी तरह खत्म हो जाएगा। पैकेज्ड फूड, चॉकलेट, पास्ता और फ्रूट जूस पर भी टैक्स शून्य हो जाएगा।
इस डील के तहत भारत के लगभग 9,425 उत्पादों पर यूरोप के बाजारों में टैक्स पूरी तरह खत्म हो जाएगा। इससे भारत का 99 प्रतिशत से अधिक निर्यात अब टैक्स फ्री होगा, जिसका सीधा फायदा करीब 6 लाख 75 हजार करोड़ रुपये के भारतीय निर्यात को मिलेगा। विशेष रूप से टेक्सटाइल, लेदर (चमड़ा), फुटवेयर और जेम्स-ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों पर टैक्स शून्य या भारी कटौती की गई है, जिससे सूरत, लुधियाना, आगरा और कानपुर जैसे शहरों के उद्योगों को यूरोप के 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के बाजार में बिना टैक्स के प्रवेश मिलेगा।
यह समझौता न केवल सामानों के व्यापार को आसान बनाएगा, बल्कि सर्विस सेक्टर और प्रोफेशनल्स के लिए भी नए अवसर पैदा करेगा। आईटी, बैंकिंग और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में व्यापार तेजी से बढ़ेगा, जिससे भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। यूरोपीय कंपनियां भारत में पहले से ज्यादा निवेश करेंगी, जिससे टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और देश में रोजगार दोनों बढ़ेंगे। इसके अलावा, यूरोप में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों को पढ़ाई पूरी होने के बाद कम से कम 9 महीने की वीजा सुरक्षा मिलेगी, ताकि वे वहां नौकरी के अवसर तलाश सकें।
कुल मिलाकर, भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुआ यह फ्री ट्रेड एग्रीमेंट केवल व्यापारिक आंकड़ों को बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में मजबूती देता है, रोजगार के नए अवसर पैदा करता है और लगभग 191 करोड़ लोगों की जिंदगी पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव डालेगा।









