भारत को यूरोप से नहीं मिलेगा कबाड़, जानिए इससे देश को क्या होगा नुकसान

यूरोप से कबाड़ आयात बंद होने की स्थिति में भारत को कई मोर्चों पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। जानिए इससे जुड़ी पूरी बात।

नई दिल्ली: भारत के recycling और metal industry के सामने आने वाले समय में एक नई चुनौती खड़ी हो सकती है। यूरोपीय संघ यानी EU ने एक प्रस्ताव जारी किया है, जिसके तहत मई 2027 से भारत समेत कुछ non-OECD देशों को यूरोप से metal waste और aluminium scrap का आयात करने की अनुमति नहीं मिल सकती है। हालांकि, यह अभी अंतिम प्रतिबंध नहीं है और प्रस्ताव पर आगे की regulatory प्रक्रिया बाकी है।

इस प्रस्ताव का संबंध EU के Waste Shipment Regulation से है। यूरोपीय आयोग का कहना है कि गैर-OECD देशों को कुछ प्रकार के waste export की अनुमति तभी दी जाएगी, जब वे यह साबित कर सकें कि उसका treatment और disposal पर्यावरण के लिहाज से सुरक्षित तरीके से किया जाता है।

आखिर EU ऐसा क्यों कर रहा है?

EU के नए framework का उद्देश्य waste को ऐसे देशों में भेजने पर नियंत्रण बढ़ाना है, जहां उसके पर्यावरणीय treatment को लेकर पर्याप्त safeguards होने का सवाल उठता है। Metal waste को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है क्योंकि इसमें toxic और heavy metals मौजूद होने की संभावना हो सकती है। इसी वजह से इसके handling, recycling और disposal को लेकर ज्यादा कड़े मानक अपनाए जा रहे हैं।

भारत पर क्या पड़ेगा असर?

भारत दुनिया के बड़े scrap-importing markets में शामिल है और domestic aluminium scrap की जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से पूरा करता है। ऐसे में EU से aluminium scrap की supply सीमित होने पर भारतीय recyclers को दूसरे international markets की ओर रुख करना पड़ सकता है।

इससे कुछ कंपनियों के लिए raw material procurement cost और logistics cost बढ़ सकती है। अगर alternative sources से scrap महंगा मिलता है, तो इसका असर recycled metal की लागत पर भी पड़ सकता है।

Aluminium recycling industry के लिए चुनौती

भारत में aluminium scrap का इस्तेमाल recycling और secondary aluminium production में बड़े पैमाने पर किया जाता है। EU से supply में कमी आने पर recycling कंपनियों को domestic collection बढ़ाने या दूसरे देशों से scrap import करने की जरूरत पड़ सकती है।

Industry के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि EU से मिलने वाली supply की जगह कितनी जल्दी और किस लागत पर alternative sources तैयार किए जा सकते हैं।

2026 में कितना aluminium scrap आया?

उपलब्ध industry data के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच भारत ने EU से करीब 1.66 लाख टन aluminium scrap import किया, जो इस अवधि में भारत के कुल aluminium scrap imports का लगभग 18.4 फीसदी था। इससे पता चलता है कि European supply भारतीय recycling industry के लिए कितनी महत्वपूर्ण है।

पहले 15% Export Duty की भी थी चर्चा

EU की ओर से aluminium scrap पर पहले 15 फीसदी export duty लगाने की योजना पर भी चर्चा हुई थी। बाद में इस proposal को आगे नहीं बढ़ाया गया। अब EU ने waste shipment regulations के जरिए scrap exports को नियंत्रित करने का रास्ता प्रस्तावित किया है। यानी मामला सिर्फ tariff का नहीं, बल्कि waste-management rules का भी बन गया है।

32 देशों ने मांगी थी छूट

EU के प्रस्ताव से जुड़े process में कुल 32 non-OECD देशों ने कुछ non-hazardous waste categories के लिए exemption मांगी थी। इसके लिए संबंधित देशों को यह दिखाना था कि imported waste को environmentally sound तरीके से process किया जा सकता है। भारत को कई अन्य waste categories के लिए access जारी रखने की अनुमति प्रस्तावित सूची में मिली है, लेकिन metal waste को लेकर स्थिति अलग है।

क्या भारत में महंगा हो सकता है Metal Scrap?

अगर EU से metal scrap की supply वास्तव में प्रतिबंधित होती है, तो भारतीय buyers को दूसरे देशों से material खरीदना पड़ सकता है। इससे sourcing और transportation costs बढ़ने की संभावना है। हालांकि, इसका अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय industry कितनी जल्दी domestic scrap collection और alternative import sources को बढ़ा पाती है।

Recycling sector के सामने क्या विकल्प हैं?

Industry के सामने broadly तीन रास्ते हो सकते हैं:

  • Domestic scrap collection को बढ़ाना
  • अमेरिका, ब्रिटेन या अन्य markets से scrap sourcing बढ़ाना
  • Recycling और processing technology में investment बढ़ाना

लंबी अवधि में domestic scrap collection मजबूत होने से imported raw material पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।

EU के भीतर भी उठ रहे हैं सवाल

इस प्रस्ताव को लेकर यूरोप की aluminium industry के कुछ हिस्सों में भी असहमति सामने आई है। Industry representatives का तर्क है कि export restrictions के बजाय ऐसा mechanism बेहतर हो सकता है जिससे recyclable raw material यूरोप के भीतर उपलब्ध रहे और वहां के struggling smelters को support मिले।

अभी क्या है स्थिति?

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मई 2027 से लागू होने वाला अंतिम प्रतिबंध अभी तय नहीं माना जाना चाहिए। European Commission ने प्रस्ताव जारी किया है और संबंधित प्रक्रिया के तहत consultation चल रही है। इसलिए आने वाले महीनों में सूची और नियमों में बदलाव संभव है।

अगर metal scrap पर मौजूदा प्रस्ताव अंतिम रूप लेता है, तो भारत के recycling sector को European supply की जगह नए sources और domestic collection पर ज्यादा निर्भर होना पड़ेगा। इसका असर raw material costs से लेकर recycled aluminium की कीमतों तक दिखाई दे सकता है।

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