भारत और अमेरिका के बीच व्यापार शुल्क (टैरिफ) को लेकर चला आ रहा लंबा तनाव आखिरकार खत्म हो गया है। हाल ही में दोनों देशों ने एक नई ट्रेड डील पर सहमति जताई है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आम जनता के लिए बेहद फायदेमंद बताया है। यह समझौता न केवल टैरिफ कम करेगा, बल्कि दोनों देशों के बीच निवेश और रोजगार के नए अवसर भी खोलेगा।
तनाव खत्म करने में अजित डोभाल की भूमिका
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब कुछ समय पहले तक दोनों देशों के रिश्तों में व्यापारिक तनाव काफी बढ़ गया था। रिश्तों में आई इस कड़वाहट को दूर करने में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल की भूमिका महत्वपूर्ण रही। अमेरिका के दौरे के दौरान उन्होंने अमेरिकी प्रशासन के समक्ष भारत का सख्त रुख स्पष्ट करते हुए साफ शब्दों में कहा था कि भारत किसी भी तरह के दबाव में आने वाला नहीं है। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि दोस्ती और व्यापार बराबरी और सम्मान के आधार पर होना चाहिए, न कि धमकी के जरिए। भारत का यह स्पष्ट रुख था कि वह देशहित को सर्वोपरि रखते हुए अमेरिका के साथ व्यापार बढ़ाना चाहता है, जिसके बाद धीरे-धीरे बातचीत का माहौल बेहतर हुआ।
नई डील के फायदे और सरकार का बयान
काफी समय तक चली बातचीत के बाद अब भारत और अमेरिका के बीच नई ट्रेड डील पर सहमति बन गई है। इस समझौते में टैरिफ कम करने और व्यापार को आसान बनाने की बात कही गई है, जिससे भारतीय सामान को अमेरिका के बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलेगी और अमेरिकी कंपनियों को भारत में काम करने के ज्यादा मौके मिलेंगे।
समझौते पर प्रमुख नेताओं के विचार:
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस डील पर कहा कि जब दुनिया के दो बड़े लोकतंत्र मिलकर काम करते हैं, तो इसका सीधा फायदा आम लोगों को होता है। यह समझौता रोजगार को बढ़ावा देगा और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने भी इस समझौते को दोनों देशों के लिए फायदेमंद बताया और इसे सभी के लिए लाभकारी करार दिया।
इस नई डील के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि भारत और अमेरिका के रिश्ते और मजबूत होंगे। व्यापार, निवेश और तकनीक के क्षेत्र में नए रास्ते खुलेंगे। यह समझौता यह भी दर्शाता है कि बातचीत और धैर्य के माध्यम से बड़े व्यापारिक विवादों को भी सफलतापूर्वक सुलझाया जा सकता है। यह डील आने वाले समय में बेहतर सहयोग और मजबूत दोस्ती का आधार बनेगी।
यह व्यापार समझौता न केवल दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि वैश्विक मंच पर भी भारत की मजबूत कूटनीतिक स्थिति को दर्शाता है।









