पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की बढ़ती कीमतों का असर अब हवाई यात्रा पर भी दिखाई देने लगा है. IndiGo ने 6 अक्टूबर से की गई नई बुकिंग पर फ्यूल चार्ज में बदलाव करने का ऐलान किया है. एयरलाइन के मुताबिक, पिछले कुछ समय में ATF की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई है, जिससे परिचालन लागत पर दबाव बढ़ा है. एयरलाइन ने कहा कि ATF की कीमतों में हालिया महीने-दर-महीने 14 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है. पश्चिम एशिया के मौजूदा घटनाक्रम ने वैश्विक ईंधन बाजार में अनिश्चितता को और बढ़ाया है. इसी को देखते हुए कंपनी ने नई बुकिंग के लिए फ्यूल चार्ज में संशोधन किया है.
500 किलोमीटर तक की घरेलू उड़ान पर ₹375 चार्ज
IndiGo के संशोधित फ्यूल चार्ज के तहत घरेलू उड़ानों के लिए दूरी के आधार पर अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया गया है. 500 किमी तक: ₹375, 501-1,000 किमी: ₹600, 1,001-1,500 किमी: ₹900, 1,501-2,000 किमी: ₹1,150, 2,000 किमी से अधिक: ₹1,300. ये शुल्क 6 अक्टूबर से की गई नई बुकिंग पर लागू किए गए हैं.
इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर भी बढ़ा फ्यूल चार्ज
इंडिगो ने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए भी रूट और दूरी के आधार पर फ्यूल चार्ज तय किया है. SAARC क्षेत्र: 500 किमी तक ₹1,000 और 501 किमी से अधिक ₹3,000, साउथ-ईस्ट एशिया, GCC और मिडिल ईस्ट, नॉर्थ एवं ईस्ट एशिया: ₹5,500, अफ्रीका: ₹6,000, यूरोप: ₹10,000. एयरलाइन का कहना है कि ये बदलाव बढ़ती ईंधन लागत के बीच परिचालन खर्च को संतुलित करने के लिए किए गए हैं.
‘यात्रियों पर अतिरिक्त बोझ का अफसोस’
IndiGo ने कहा कि उसे यात्रियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ का अफसोस है. हालांकि, एयरलाइन के मुताबिक वैश्विक ईंधन कीमतों में अस्थिरता के बीच यह बदलाव लागत के दबाव को संभालने के लिए जरूरी कदम है.
उड्डयन मंत्री बोले- एयरलाइंस और OMCs से बातचीत जारी
IndiGo के फ्यूल चार्ज में बदलाव के बाद केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा कि सरकार पश्चिम एशिया संकट के असर को कम करने के लिए एयरलाइंस और तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) दोनों से बातचीत कर रही है. मंत्री ने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक पश्चिम एशिया का संकट है और यह ATF की कीमतों पर काफी दबाव डाल रहा है, लेकिन हम अभी भी एयरलाइंस और OMCs दोनों के साथ बातचीत कर रहे हैं, देखते हैं कि बातचीत कैसे आगे बढ़ती है।”
क्यों बढ़ रहा है ATF की कीमतों पर दबाव?
एयरलाइंस के लिए ATF परिचालन लागत का एक प्रमुख हिस्सा है. कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रम के कारण ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ा है. ऐसे में एयरलाइंस अपनी लागत को नियंत्रित करने के लिए फ्यूल सरचार्ज जैसे उपायों का सहारा ले रही हैं. इंडिगो के इस फैसले के बाद अब यात्रियों के लिए हवाई टिकट की कुल लागत बढ़ सकती है. सरकार की एयरलाइंस और OMCs के साथ चल रही बातचीत के नतीजे पर आगे की स्थिति निर्भर करेगी.