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ईरान में आयातुल्लाह खामेनेई की मौत: क्या तीसरे विश्व युद्ध का सायरन बज गया है?

ईरान में आयातुल्लाह खामेनेई की मौत

अंतरराष्ट्रीय पटल पर इस वक्त की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर ईरान से आ रही है। अमेरिकी और इजरायली हवाई हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत की आधिकारिक पुष्टि हो गई है। इस घटना ने पूरे पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में भूचाल ला दिया है। जहां एक ओर ईरान में मातम पसरा है, वहीं दूसरी ओर उसने ‘इतिहास के सबसे भयानक बदले’ की कसम खाई है, जिससे वैश्विक शांति पर गहरा खतरा मंडरा रहा है।

हालिया घटनाक्रम में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावे के बाद अब खुद ईरान की सरकारी मीडिया ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि शनिवार को हुए इजरायली और अमेरिकी हवाई हमले में आयातुल्लाह अली खामेनेई मारे गए हैं। इस हमले में खामेनेई के परिवार के अन्य सदस्य, जिनमें उनके बेटे, बेटी, दामाद और पोते शामिल हैं, की भी दुखद मौत हो गई। ईरान में इस वक्त शोक का माहौल है; गलियों में लोग अपने नेता की शहादत पर मातम मना रहे हैं। सरकार ने 40 दिनों के शोक और 7 दिनों की छुट्टी का ऐलान किया है। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने अमेरिका को दुनिया के नक्शे से मिटाने की कसम खाई है और ऐलान किया है कि वह अब तक के इतिहास के ‘सबसे विनाशकारी और अदृश्य’ हथियारों से अमेरिका पर हमला करने जा रहा है।

ईरान ने तुरंत जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। बहरीन और दुबई के इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स को निशाना बनाया गया है, जिन्हें अमेरिका के लॉन्च पैड बताया जा रहा है। दुबई में अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के दफ्तर को भी बमों से उड़ा दिया गया है, जिसके बाद चारों तरफ आग और धुएं का गुबार देखा गया। कुवैत में मौजूद अमेरिकी एयरबेस ‘अली अल सलेम’ पर भी ईरानी मिसाइलें गिरी हैं, जिसकी पुष्टि चीनी सैटेलाइट तस्वीरों ने की है। इजरायल का ‘बेत शेमेश’ शहर भी ईरानी मिसाइलों की चपेट में आने से जल रहा है। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपातकालीन बैठक बुलाई गई है, जहाँ संयुक्त राष्ट्र ने इस हमले को उकसावे की कार्रवाई बताया है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी मोर्चा संभालते हुए इजरायल, ईरान और यूएई समेत कई देशों से संपर्क साधा है, खासकर दुबई एयरपोर्ट पर बड़ी संख्या में भारतीय नागरिकों के फंसे होने के कारण।

इस बीच, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आयातुल्लाह खामेनेई का जाना ईरान की सत्ता का अंत है या एक नए और खूंखार अध्याय की शुरुआत? ईरान ने तेजी से अपने नए कमांडर-इन-चीफ ब्रिगेडियर जनरल अहमद वाहिदी का ऐलान किया है, जिनके नाम से पश्चिम पहले से ही खौफ खाता है। उत्तराधिकार की दौड़ में मुज्तबा खामेनेई का नाम सबसे ऊपर है, जिन्हें उनके पिता का सबसे भरोसेमंद और कट्टर उत्तराधिकारी माना जाता है। जानकारों का मानना है कि अगर मुज्तबा के हाथों में कमान आती है, तो समझौते के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे और जंग का खुला ऐलान होगा। उधर, व्हाइट हाउस से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बयान दिया है कि ‘कूटनीति अब आसान हो गई है’, लेकिन ईरानी कमांडरों ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास ऐसे ‘अदृश्य हथियार’ और मिसाइलें हैं जो रडार की पकड़ में नहीं आतीं, और अब इनका निशाना सीधा अमेरिकी मुख्य भूमि भी हो सकता है।

वर्तमान में पूरी दुनिया दो गुटों में बंटी नजर आ रही है। एक तरफ इजरायल और अमेरिका अपनी ‘जीत’ का जश्न मना रहे हैं, तो दूसरी तरफ रूस और चीन की चुप्पी एक बड़े तूफान का संकेत दे रही है। क्या यह तीसरे विश्व युद्ध का वो सायरन है जिसे पूरी दुनिया अनसुना कर रही थी? आज पूरी दुनिया की सांसें थमी हुई हैं और सबकी नजरें सिर्फ एक ही जगह टिकी हैं—तेहरान के अगले कदम पर।