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ईरान में महाविद्रोह: 80 से ज्यादा शहरों में भड़की हिंसा, 60 से अधिक गई जानें, क्यों बेकाबू हुए हालात?

ईरान में महंगाई और बेरोजगारी के विरोध में सड़कों पर आगजनी करते और सुरक्षाबलों से भिड़ते प्रदर्शनकारी।

ईरान में हालात बेकाबू होते जा रहे हैं। आर्थिक संकट, बेरोज़गारी और हालिया घटनाओं को लेकर लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर भयंकर विद्रोह के रूप में फूट पड़ा है। यह विरोध प्रदर्शन देश के 80 से अधिक शहरों में फैल चुका है, जहां सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है।

पिछले दस दिनों से जारी इन विरोध प्रदर्शनों ने ईरान के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। अब तक मिली जानकारी के अनुसार, इस उथल-पुथल में 60 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें चार बच्चे और कुछ सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। प्रदर्शनकारी सड़कों पर खड़ी गाड़ियों में तोड़फोड़ कर रहे हैं और उन्हें आग के हवाले कर दिया गया है। कई सरकारी और निजी इमारतों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। हालात नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने अब तक 1200 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है, लेकिन हिंसक झड़पें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।

ईरान में इस विशाल प्रदर्शन के कई कारण हैं। मुख्य कारणों में बढ़ती महंगाई, बेरोज़गारी और देश की बिगड़ती अर्थव्यवस्था शामिल है। हालांकि, विरोध की आग तब भड़की जब 22 वर्षीय महसा अमिनी की हिरासत में मौत हो गई। इसके अलावा, हिजाब को लेकर सरकार की सख़्ती और अन्य दमनकारी नीतियों ने भी लोगों के गुस्से को बढ़ाया है। यह विरोध 31 में से 27 प्रांतों और करीब 250 से ज्यादा जगहों तक फैल चुका है।

अमेरिका समेत कई अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां ईरान की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति ने भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर दबाव बनाने की कार्रवाई की निंदा की है। ईरान की मुद्रा पहले ही अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच चुकी थी। ऐसे में, यह व्यापक जनाक्रोश देश के लिए एक गंभीर संकट पैदा कर रहा है।

सड़कों पर जलती गाड़ियां और आम लोगों का गुस्सा साफ तौर पर यह संकेत दे रहा है कि ईरान इस वक्त एक बड़े आंतरिक संकट से गुज़र रहा है, जिस पर काबू पाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा है।