ईरान में विद्रोह: 13वें दिन भी जनता सड़कों पर, Khamenei की सत्ता खतरे में, क्या होगी क्राउन प्रिंस रजा पहलवी की वापसी?

Tehran में आग, Khamenei की सत्ता
Tehran में आग, Khamenei की सत्ता

ईरान इस समय राजनीतिक और आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। पिछले 13 दिनों से राजधानी तेहरान समेत देश के सभी 31 प्रांतों में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं और सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ ‘तानाशाह मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे हैं। रियाल क्रैश होने और अर्थव्यवस्था ढहने के कारण शुरू हुआ यह गुस्सा अब सीधे सत्ता परिवर्तन की मांग में बदल चुका है। ताज़ा अपडेट यह है कि प्रदर्शनों को दबाने के लिए देश में डिजिटल ब्लैकआउट किया गया है, लेकिन इसके बावजूद विरोध जारी है।

ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों की मुख्य वजह देश की बदहाल अर्थव्यवस्था है। महंगाई 40 प्रतिशत से अधिक हो चुकी है, और आम लोगों के लिए खाने-पीने की चीजें, दवाइयां और ईंधन खरीदना मुश्किल हो गया है। सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों ने 8 जनवरी को कई सरकारी इमारतों और बसों में आग लगा दी। विरोध को दुनिया से छिपाने के लिए 8 जनवरी को सरकार ने पूरे ईरान में 18 घंटे के लिए इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं बंद कर दी थीं, हालांकि अब इंटरनेट धीमी गति से बहाल हुआ है, ताकि विरोध प्रदर्शनों के वीडियो सोशल मीडिया तक न पहुंच सकें।

इस आंदोलन के बीच, 86 वर्षीय सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने नेशनल टीवी पर अपने समर्थकों को संबोधित किया। खामेनेई ने साफ किया कि उनकी सरकार प्रदर्शनकारियों के सामने नहीं झुकेगी और यह इस्लामिक शासन लाखों लोगों के बलिदान से स्थापित हुआ है। उन्होंने इन प्रदर्शनों के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ बताते हुए कहा कि ‘दंगाई’ अमेरिका के राष्ट्रपति को खुश करने के लिए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। दूसरी ओर, प्रदर्शनकारी ईरान के आखिरी शाह के निर्वासित बेटे और क्राउन प्रिंस, 65 वर्षीय रजा पहलवी की वापसी की मांग कर रहे हैं। रजा पहलवी इस समय अमेरिका में रहते हैं और सोशल मीडिया के माध्यम से अपने समर्थकों से विरोध तेज करने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने ईरानी सेना से भी अपील की है कि वे सरकार की बजाय जनता का साथ दें।

इस संकट पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान सरकार को चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि अगर निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाई गईं या उन्हें फांसी दी गई, तो अमेरिका बर्दाश्त नहीं करेगा और ‘सख्त जवाब’ देगा। ईरान की सरकार ने अब तक 2200 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 45 प्रदर्शनकारी और चार सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। पश्चिमी मीडिया के मुताबिक, यह संख्या कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि सरकार सही आंकड़े नहीं बता रही है। दुबई और तुर्की से ईरान जाने वाली 34 उड़ानें रद्द होने से साफ है कि ईरान के हालात नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं, और कई पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स में यह आशंका जताई जा रही है कि यदि हालात बिगड़े तो खामेनेई रूस भाग सकते हैं।

ईरान इस समय एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। जहां एक तरफ सत्ता प्रतिष्ठान झुकने को तैयार नहीं है, वहीं दूसरी ओर जनता की आर्थिक बदहाली और सत्ता विरोधी भावना चरम पर है। दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या 47 साल से निर्वासन में रह रहे रजा पहलवी सोशल मीडिया के दम पर इस्लामिक शासन को पलटकर वापस ईरान की सत्ता संभालेंगे, या फिर विदेशी दखल की आशंका के बीच यह विद्रोह दबा दिया जाएगा।

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