जम्मू-कश्मीर सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित भूमिहीन परिवारों के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। हाल की बाढ़, भूस्खलन और भूकंप जैसी घटनाओं में बेघर हुए हजारों परिवारों को अब स्थायी आवास मिलने की उम्मीद जगी है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने घोषणा की है कि आपदा में अपनी जमीन गंवाने वाले परिवारों को घर बनाने के लिए 40 साल की अवधि के लिए सरकारी जमीन पट्टे पर दी जाएगी। यह फैसला आपदा पीड़ितों के जीवन को फिर से पटरी पर लाने में मील का पत्थर साबित हो सकता है।
प्राकृतिक आपदाओं से बेघर हुए परिवारों के लिए यह योजना तत्काल राहत लाएगी। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ऐलान करते हुए कहा कि जिन परिवारों के पास अपनी जमीन नहीं है और जो बाढ़, भूस्खलन या बादल फटने जैसी आपदाओं में बेघर हो गए हैं, उन्हें अब सरकार पट्टे पर जमीन देगी। इस जमीन का उपयोग केवल घर बनाने के लिए किया जाएगा और सरकार का प्राथमिक मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी प्रभावित परिवार बिना छत के न रहे।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बीजेपी विधायक बलवंत सिंह मनकोटिया के सवाल के लिखित जवाब में इस योजना का विस्तृत विवरण दिया। उन्होंने बताया कि आपदा से प्रभावित भूमिहीन परिवारों को 40 साल के लिए पांच-पांच मरला सरकारी जमीन आवंटित की जाएगी। इसके लिए सरकारी आदेश 2 जनवरी को जारी कर दिया गया है। योजना के तहत लाभार्थियों को इस जमीन के लिए प्रति मरला केवल 10 रुपये वार्षिक किराया देना होगा, जिससे यह बेहद किफायती होगा। आवश्यकता पड़ने पर सक्षम अधिकारी की मंजूरी से इस पट्टे की समय सीमा आगे भी बढ़ाई जा सकती है।
उधमपुर जिले में विशेष सहायता और बहाली कार्य
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने उधमपुर जिले की स्थिति का खास तौर पर जिक्र किया, जहां अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से 6,400 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। उन्होंने जानकारी दी कि इन परिवारों को अब तक घर, सामान और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए 23.49 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। उन्होंने यह भी सुनिश्चित किया कि आपदा की वजह से क्षतिग्रस्त हुई सड़कों, पुलों और संपर्क मार्गों की मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है, ताकि प्रभावित क्षेत्रों की बुनियादी सुविधाओं को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके। यह योजना केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर में लागू की जाएगी।
सरकार के इस ऐतिहासिक फैसले के बाद आपदा प्रभावित इलाकों में लोगों के बीच आशा की नई किरण जगी है, और उन्हें अब सुरक्षित और स्थायी घर मिलने का भरोसा है।









