पूर्वांचल के दो प्रमुख शहर, जौनपुर और आजमगढ़, जल्द ही ट्रैफिक जाम की समस्या से मुक्त होने वाले हैं। केंद्र सरकार ने इन दोनों शहरों के लिए दो महत्वपूर्ण फोरलेन बाईपास परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य न केवल यात्रा के समय को कम करना है, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को एक नई गति प्रदान करना भी है।
इन बाईपास परियोजनाओं को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की मंजूरी मिल चुकी है, जिसके बाद इन पर जल्द ही काम शुरू होने की उम्मीद है। ये परियोजनाएं पूरे पूर्वांचल में रिंग रोड के मजबूत जाल को तैयार करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगी।
जौनपुर के लिए स्वीकृत फोरलेन बाईपास में कई आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं। इस परियोजना के तहत गोमती नदी पर एक 200 मीटर लंबा और मजबूत पुल बनाया जाएगा। इसके अलावा, यात्रियों और छोटे वाहनों के लिए दो बड़े और तीन छोटे अंडरपास, 8.76 किमी सर्विस रोड, 7.2 किमी स्लिप रोड, एक फ्लाइओवर और एक बड़ा इंटरचेंज भी शामिल है। भारी वाहन अब शहर के बीच से गुजरने के बजाय सीधे बाईपास से निकल सकेंगे, जिससे शहर के भीतर ट्रैफिक जाम में भारी कमी आएगी। बेहतर कनेक्टिविटी से जौनपुर के व्यापारी आसानी से वाराणसी, लखनऊ और आजमगढ़ जैसे बड़े शहरों तक अपना माल पहुंचा सकेंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
आजमगढ़ में भी 1279.13 करोड़ रुपये की लागत से 15 किलोमीटर लंबा फोरलेन दक्षिण-पूर्व बाईपास (रिंग रोड) स्वीकृत किया गया है। यह महत्वपूर्ण बाईपास नेशनल हाईवे-28 को सीधे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा। यह रिंग रोड रानी की सराय से शुरू होकर पूर्वी टेंपल (एक्सप्रेसवे के निकट) पर समाप्त होगा। इस परियोजना में एक फ्लाईओवर, दो आधुनिक इंटरचेंज, आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) और कई अंडरपास शामिल हैं। यह बाईपास शहर के भीतर ट्रैफिक को बाधामुक्त बनाएगा और लगभग 24 गांवों को मुख्य आर्थिक नेटवर्क से जोड़कर उनके विकास का मार्ग प्रशस्त करेगा।
ये दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाएं पूर्वांचल के निवासियों के लिए एक नई सुबह लाएंगी, जहां बेहतर कनेक्टिविटी से व्यापारिक गतिविधियाँ बढ़ेंगी और स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।









