दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में दीवारों पर लिखे गए राजनीतिक और वैचारिक नारों को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. जामिया मिलिया इस्लामिया में विवादित नारों का मामला सामने आने के बाद अब जेएनयू परिसर में भी अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े संदेशों को लेकर चर्चा तेज है. दीवारों पर लिखे नारों के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले का संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है.
दीवारों पर लिखे मिले अलग-अलग नारे
जानकारी के मुताबिक, जेएनयू परिसर की कुछ दीवारों पर पूर्व छात्र उमर खालिद की रिहाई की मांग करते हुए ‘फ्री उमर खालिद’ और ‘नक्सलबाड़ी जिंदाबाद’ जैसे नारे लिखे गए. इसके अलावा, ‘आरएसएस गो बैक’ और ‘वीसी गो बैक’ जैसे संदेश भी सामने आए. वहीं, परिसर की कुछ अन्य दीवारों पर ‘अखंड भारत’ जैसे नारे भी लिखे होने की बात कही जा रही है. कुछ जगहों पर ‘स्टॉप लव जिहाद’ का संदेश भी सामने आया. अलग-अलग विचारधाराओं से जुड़े इन नारों के कारण कैंपस में वैचारिक टकराव को लेकर बहस शुरू हो गई है.
ABVP ने वामपंथी छात्र संगठनों पर लगाए आरोप
इस मामले को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की जेएनयू इकाई ने आपत्ति जताई है. संगठन का आरोप है कि वामपंथी छात्र संगठन इस तरह की गतिविधियों के जरिए विश्वविद्यालय के शैक्षणिक माहौल को प्रभावित कर रहे हैं.
वहीं, सोशल मीडिया पर सामने आई कुछ तस्वीरों को लेकर भी विवाद हो रहा है. ABVP की ओर से आरोप लगाया गया है कि ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के सदस्य हिंदुत्व विचारक वीर सावरकर के चित्र के पास आपत्तिजनक बातें लिखते दिखाई दिए.
JNU प्रशासन ने शुरू की जांच
दीवारों पर लिखे नारों के मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है. अधिकारियों का कहना है कि परिसर की शांति और शैक्षणिक वातावरण को प्रभावित करने वाली गतिविधियों को गंभीरता से लिया जाएगा.
जांच के तहत यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि दीवारों पर नारे किसने और कब लिखे. खबर के मुताबिक, घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के तार कटे हुए पाए गए हैं. इससे संबंधित लोगों की पहचान करने में परेशानी आने की आशंका जताई गई है.
कैंपस में वैचारिक टकराव पर बढ़ी चर्चा
जेएनयू में दीवारों पर लिखे नारों को लेकर उठा विवाद एक बार फिर छात्र राजनीति और वैचारिक मतभेदों को चर्चा में ले आया है. जहां अलग-अलग छात्र संगठन एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं, वहीं प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस घटनाक्रम में कौन शामिल था और इसके पीछे क्या परिस्थितियां थीं.