मोकामा में दशकों से दबदबा, कभी खुद तो कभी पत्नी विधायक, कौन हैं ‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह?

‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह
‘छोटे सरकार’ अनंत सिंह

पटना: बिहार की राजनीति में मोकामा का जिक्र हो और अनंत सिंह का नाम न आए, ऐसा कम ही होता है. ‘छोटे सरकार’ के नाम से मशहूर अनंत सिंह की पहचान एक ऐसे नेता के रूप में रही है, जिनका मोकामा की राजनीति में लंबे समय से प्रभाव है. कभी जनता दल यूनाइटेड (JDU), कभी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कभी निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़कर उन्होंने अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखी. अब अक्टूबर 2026 में जदयू से छह साल के लिए निष्कासन के बाद एक बार फिर वह चर्चा में हैं. अनंत सिंह के परिवार का मोकामा की राजनीति में करीब 35 वर्षों से प्रभाव रहा है. उनके बड़े भाई दिलीप सिंह भी विधायक रह चुके हैं. अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी ने भी मोकामा विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया है. आइए जानते हैं ‘छोटे सरकार’ के राजनीतिक सफर, परिवार और उनकी अलग पहचान की कहानी.

भाई दिलीप सिंह से शुरू हुआ राजनीतिक प्रभाव

अनंत सिंह के परिवार की मोकामा की राजनीति में मजबूत मौजूदगी की शुरुआत उनके बड़े भाई दिलीप सिंह से जुड़ी है. वर्ष 1990 में दिलीप सिंह जनता दल के टिकट पर विधायक चुने गए. 1995 में भी उन्होंने जीत दर्ज की. हालांकि, वर्ष 2000 के विधानसभा चुनाव में परिवार को झटका लगा, जब सूरजभान सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीतकर विधानसभा पहुंचे. इसके बाद मोकामा की राजनीति में अनंत सिंह का प्रभाव बढ़ता गया.

2005 में पहली बार विधायक बने अनंत सिंह

अनंत सिंह ने वर्ष 2005 में जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर मोकामा विधानसभा सीट से पहली बार जीत दर्ज की. उसी वर्ष हुए विधानसभा के दूसरे चुनाव में भी वह जीतने में सफल रहे. वर्ष 2010 में भी उन्होंने जदयू के टिकट पर अपनी सीट बरकरार रखी. वर्ष 2015 में पार्टी से मतभेद के बाद अनंत सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव मैदान में उतरे और जीत हासिल की. इस चुनाव में उन्होंने जदयू के उम्मीदवार नीरज कुमार को हराया था. लगातार चुनावी जीत के चलते मोकामा में उनकी राजनीतिक पकड़ मजबूत बनी रही. स्थानीय जातीय समीकरणों और समर्थकों के बीच उनकी लोकप्रियता को भी उनकी चुनावी सफलता के प्रमुख कारणों में गिना जाता है.

कभी JDU तो कभी RJD के टिकट पर लड़ा चुनाव

अनंत सिंह के राजनीतिक सफर में दलों के साथ उनके रिश्ते बदलते रहे. वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर चुनाव लड़ा और मोकामा सीट से जीत दर्ज की. उनकी राजनीति के साथ आपराधिक मामलों की चर्चा भी जुड़ी रही है. उनके चुनावी हलफनामों में हत्या, अपहरण और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों का उल्लेख रहा है. एक मामले में उन्हें सजा भी हुई थी. इन घटनाओं ने उनकी छवि को प्रभावित किया. जहां आलोचक उनके आपराधिक मामलों को लेकर सवाल उठाते रहे हैं, वहीं उनके समर्थक उन्हें मोकामा में मजबूत जनाधार रखने वाला नेता बताते हैं.

महंगी गाड़ियों, गहनों और घोड़ों के शौकीन हैं ‘छोटे सरकार’

अनंत सिंह अपने अलग अंदाज और शौक के लिए भी जाने जाते हैं. महंगी गाड़ियों, आभूषणों और जानवरों के प्रति उनका लगाव अक्सर चर्चा में रहता है. उनके पास महंगी टोयोटा लैंड क्रूजर होने की जानकारी सामने आती रही है. चुनावी हलफनामे में उनके और उनकी पत्नी के आभूषणों की कीमत भी दर्ज की गई थी. हालांकि, संपत्ति के इन आंकड़ों को संबंधित हलफनामे के वर्ष के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए. अनंत सिंह को हाथी और घोड़े पालने का भी शौक है. उन्हें कई बार घुड़सवारी करते और बग्घी से विधानसभा परिसर पहुंचते देखा गया है. उनके इस अंदाज ने उन्हें बिहार की राजनीति में एक अलग पहचान दी है.

पत्नी नीलम देवी भी रह चुकी हैं विधायक

अनंत सिंह के परिवार की राजनीतिक भूमिका सिर्फ उन्हीं तक सीमित नहीं रही. उनकी पत्नी नीलम देवी भी मोकामा से विधायक रह चुकी हैं. इस तरह परिवार ने अलग-अलग समय पर विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. अब अनंत सिंह ने अपने बड़े बेटे अभिषेक सिंह को राजनीति में आगे बढ़ाने की बात कही है. इससे मोकामा में परिवार की अगली पीढ़ी की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

JDU से निष्कासन के बाद क्या होगी अगली राह?

24 अक्टूबर 2026 को जदयू ने अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अनंत सिंह को छह साल के लिए निष्कासित करने की घोषणा की. पार्टी ने आरोप लगाया कि उन्होंने विधान परिषद चुनाव में जदयू उम्मीदवार नीरज कुमार के खिलाफ काम किया और जन सुराज के प्रत्याशी अनुज सिंह का समर्थन किया. पार्टी ने उनकी पत्नी नीलम देवी को भी निष्कासित किया और अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग को लेकर विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा. हालांकि, पार्टी से निष्कासन और विधायक पद समाप्त होने की प्रक्रिया अलग-अलग हैं. उनकी विधायकी पर फैसला नियमानुसार विधानसभा अध्यक्ष को लेना होगा. अनंत सिंह की अगली राजनीतिक रणनीति क्या होगी और उनके बेटे अभिषेक सिंह की भूमिका कितनी बढ़ेगी, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा. फिलहाल, जदयू से निष्कासन के बाद मोकामा की राजनीति में उनकी आगे की राह पर सबकी नजरें टिकी हैं.

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