जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के पूर्व प्रोफेसर और मणिपुर से कांग्रेस सांसद अंगोमचा बिमोल अकोइजम की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. 11 छात्राओं की ओर से लगाए गए कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों के मामले में दिल्ली पुलिस ने उन्हें जांच में शामिल होने के लिए नोटिस जारी किया है. पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 35(3) के तहत नोटिस देकर अपना पक्ष रखने और जांच में सहयोग करने को कहा है.
दिल्ली पुलिस ने क्यों जारी किया नोटिस?
रिपोर्टों के मुताबिक, वसंत कुंज नॉर्थ थाने में दर्ज मामले की जांच के सिलसिले में पुलिस ने अकोइजम को नोटिस दिया है. इससे पहले JNU के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर 11 अक्टूबर को उनके खिलाफ FIR दर्ज की गई थी. मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 75, 75(1)(i), 75(1)(iv) और 79 के तहत आरोप दर्ज किए गए हैं.
9 अक्टूबर को JNU ने किया था बर्खास्त
यौन उत्पीड़न की शिकायतों पर विश्वविद्यालय की आंतरिक समिति की जांच के बाद JNU ने 9 अक्टूबर को अकोइजम को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया था. रिपोर्टों के अनुसार, कम से कम 11 छात्राओं ने मई 2026 में उनके खिलाफ शिकायतें दर्ज कराई थीं. शिकायतों में आरोप लगाया गया कि अकोइजम छात्राओं को अपने आवास पर बुलाते थे और उनके साथ अनुचित व्यवहार करते थे. कुछ छात्राओं ने कक्षा में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां किए जाने के आरोप भी लगाए. विश्वविद्यालय की आंतरिक जांच के बाद उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई.
अकोइजम ने आरोपों को नकारा, जांच प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अंगोमचा बिमोल अकोइजम ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है. उन्होंने JNU की आंतरिक जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई को अनुचित बताया. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने जांच में उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया है. ऐसे में मामले में दिल्ली पुलिस की जांच अहम होगी. पुलिस की जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आरोपों से जुड़े तथ्यों पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी.
BJP महिला मोर्चा ने NCW से की कार्रवाई की मांग
इस मामले को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद रूप कुमारी चौधरी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष विजया के. रहाटकर से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने अकोइजम के खिलाफ लगे आरोपों और विश्वविद्यालय की कार्रवाई के संदर्भ में ज्ञापन सौंपकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की. मुलाकात के बाद चौधरी ने कहा कि आयोग की अध्यक्ष ने मामले को देखने का भरोसा दिया है। इस घटनाक्रम के बीच मामले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है.