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काशी के श्रीशंकराचार्य घाट पर हुआ जगद्गुरुकुलम् के बटुकों का भव्य उपनयन संस्कार

काशी में श्रीशंकराचार्य घाट पर आयोजित जगद्गुरुकुलम् के विद्यार्थियों के उपनयन संस्कार की तस्वीर, जिसमें बटुक यज्ञोपवीत धारण कर रहे हैं।

काशी की पावन धरा पर एक बार फिर सनातन परम्परा का दिव्य और अनुपम दृश्य देखने को मिला है। हाल ही में श्रीविद्यामठ से जुड़े जगद्गुरुकुलम् की काशी शाखा के छात्रों का उपनयन संस्कार पूरे विधि-विधान के साथ गंगा तट पर स्थित श्रीशंकराचार्य घाट पर सम्पन्न हुआ। इस दौरान बटुकों को ब्रह्मचर्य जीवन की दीक्षा दी गई, जिससे संपूर्ण क्षेत्र वैदिक मंत्रों की ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया।

यह पावन संस्कार पंडित रामचन्द्र देव सहित अनेक विद्वान आचार्यों के संचालन में पूर्ण श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सभी छात्रों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया और उन्हें विधिवत वेदाध्ययन तथा ब्रह्मचर्य जीवन के नियमों की दीक्षा प्रदान की गई।

आचार्यों ने इस अवसर पर बटुकों को संबोधित करते हुए बताया कि उपनयन संस्कार केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह शास्त्राध्ययन और आत्मिक अनुशासन की औपचारिक शुरुआत है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उपनीत बटुक आगे चलकर योग्य पंडित बनकर समाज को सनातन धर्म के शाश्वत मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य करेंगे।

यह आयोजन पूज्य स्वामिश्रीः अविमुक्तेश्वरानंदः सरस्वती जी महाराज के व्यापक संकल्प का हिस्सा है, जो देशभर में भारतीय संस्कृति के संरक्षण और प्रसार हेतु निरंतर सक्रिय हैं। उनके मार्गदर्शन में जगद्गुरुकुलम् की दस से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं। उनका मुख्य संकल्प है कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक निःशुल्क गुरुकुल की स्थापना हो, जिससे सनातन शिक्षा समाज के हर वर्ग तक आसानी से पहुँच सके। इस दौरान मठ के प्रभारी ब्रह्मचारी परमात्मानन्द जी ने बटुकों को विधिवत गायत्री मंत्र की दीक्षा प्रदान की। कार्यक्रम के सफल संयोजन में प्रबंधक कृष्ण कुमार पांडेय एवं उप प्राचार्य आर्यन सुमन पांडेय की विशेष भूमिका रही।

उपस्थित श्रद्धालुओं और अभिभावकों ने इस भव्य आयोजन की प्रशंसा करते हुए इसे सनातन परम्परा के संरक्षण और प्राचीन शिक्षा पद्धति को पुनर्जीवित करने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय कदम बताया।

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