महाशिवरात्रि के भव्य उत्सव के बाद, अब काशी में रंगभरी एकादशी की तैयारियां चरम पर हैं। इस खास मौके पर बाबा विश्वनाथ अपनी पत्नी माता पार्वती के साथ शाही पालकी में विराजमान होकर निकलेंगे। यह उत्सव सिर्फ एक शोभायात्रा नहीं, बल्कि महादेव और माता गौरा के विवाहोत्सव के बाद उनके गौने का एक अनूठा और भावुक प्रसंग भी है, जिसकी रौनक पूरे शहर में देखने को मिल रही है।
इस वर्ष रंगभरी एकादशी पर महादेव नवग्रह की विशेष लकड़ी से बनी एक भव्य पालकी पर राजसी खादी पोशाक पहनकर विराजमान होंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर के पूर्व महंत आवास, गौरा सदनिका में इस दौरान मंगल गीतों की गूंज सुनाई देगी। पुरानी पालकी की साफ-सफाई और मरम्मत के साथ-साथ नई पालकी के पट्टम को भी रंग-रोगन कर तैयार किया जा रहा है, ताकि महादेव और माता गौरा इसमें विराजमान हो सकें।
महादेव और माता पार्वती के विवाहोत्सव के बाद अब माता गौरा के गौने की परंपरा निभाई जाएगी। आंगन में हल्दी की सुवास, मंगल गीतों की गूंज और श्रृंगार की चहल-पहल से पूरा वातावरण उत्सवमय हो गया है। इस दौरान महादेव अपने पूरे परिवार, माता पार्वती और भगवान गणेश के साथ पालकी पर सवार होकर निकलेंगे। इस अनूठे आयोजन के आयोजक वाचस्पति तिवारी ने जानकारी देते हुए बताया कि चार दिवसीय लोकाचार का शुभारंभ माता गौरा के तेल-हल्की अनुष्ठान से होगा, जिसमें गौनहरियों की टोली पारंपरिक गीतों से इस अनुष्ठान को जीवंत बनाएगी।
गौने के दिन बाबा की चल प्रतिमा को परंपरागत खादी से विशेष रूप से तैयार कराई गई राजसी पोशाक पहनाई जाएगी, जो काशी की पारंपरिक बुनावट और सादगी का संगम होगी। माता गौरा का श्रृंगार भी विशेष अलंकरणों और वस्त्रों से किया जाएगा। शोभायात्रा में सपरिवार बाबा के दर्शन के लिए पूरी काशी उमड़ पड़ेगी, जो इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत नज़ारा होगा।
यह रंगभरी एकादशी काशी के आध्यात्मिक गौरव और सांस्कृतिक समृद्धि का प्रतीक है, जहाँ हर कोने में भक्ति और उत्साह का रंग घुला हुआ है।









