उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले में अवैध खनन का काला कारोबार इन दिनों अपने चरम पर है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सख्त नियमों और प्रशासनिक निर्देशों को ताक पर रखकर मिट्टी माफिया धड़ल्ले से इस काम को अंजाम दे रहे हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इस पूरे अवैध धंधे में स्थानीय खनिज विभाग के अधिकारियों की संलिप्तता के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं।
कौशाम्बी जनपद में अवैध खनन का यह पूरा मामला तब सामने आया जब कौशांबी थाना क्षेत्र के भैरवा गांव में बड़े पैमाने पर हो रहे मिट्टी के अवैध खनन का एक जीपीएस वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। यह वीडियो जिले में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की पोल खोलता है।
खनन निदेशक माला श्रीवास्तव ने जिले में अवैध खनन को रोकने के लिए सख्त आदेश जारी किए थे, लेकिन कौशाम्बी में उनके आदेश पूरी तरह से धराशाही होते दिखाई दे रहे हैं। पिछले माह सराय अकिल थाना क्षेत्र में CSIL कंपनी द्वारा किए जा रहे मिट्टी के खनन पर बड़ी कार्रवाई की गई थी, लेकिन यह रोक सिर्फ कागजी साबित हुई।
आरोप है कि खनिज अधिकारी सीपी जयसवाल के कथित इशारे पर यह अवैध कारोबार बेरोकटोक जारी है। बताया जाता है कि CSIL कंपनी द्वारा खनिज अधिकारी सीपी जयसवाल को ‘इनपुट’ बनाकर मिट्टी के अवैध खनन को अंजाम दिया जा रहा है।
माफिया, किसानों की भूमधरी (निजी) जमीन पर भी हैवीवेट पोकलैंड मशीनों का इस्तेमाल कर दिन-रात बड़े पैमाने पर मिट्टी निकाल रहे हैं।
जिले में मिट्टी माफियाओं का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है।
वायरल वीडियो और खनिज विभाग पर लगे गंभीर आरोपों को देखते हुए, यह आवश्यक है कि शासन तत्काल प्रभाव से मामले का संज्ञान ले। न केवल अवैध खनन पर रोक लगनी चाहिए, बल्कि उन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भी कठोर जांच और कार्रवाई होनी चाहिए जिनकी कथित संलिप्तता से NGT के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।









