दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविंद केजरीवाल को कानूनी मोर्चे पर बड़ी सफलता मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर समन अवमानना के मामले में पूरी तरह बरी कर दिया है। यह फैसला केजरीवाल और AAP दोनों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है, जिसे दिल्ली की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़े विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।
राउज एवेन्यू कोर्ट के एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने हाल ही में यह अहम आदेश सुनाया। यह मामला तब शुरू हुआ जब ईडी ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 50 के तहत जारी किए गए पांच अलग-अलग समन की जानबूझकर अवमानना की और वे एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए। इसी आधार पर ईडी ने फरवरी 2024 में अदालत में याचिका दायर की थी।
कोर्ट की स्पेशल अदालत ने ईडी के तर्कों को स्वीकार नहीं किया। एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सिर्फ समन पर पेश न होने के आधार पर ही अवमानना का अपराध अपने आप साबित नहीं होता, जब तक कि कानूनन आवश्यक शर्तें पूरी न हों। अदालत ने पाया कि इस मामले में अवमानना की धाराएं लागू करने का पर्याप्त आधार नहीं था। इसी निष्कर्ष के साथ अरविंद केजरीवाल को इस मामले से बरी कर दिया गया।
दिल्ली आबकारी नीति मामले की शुरुआत सीबीआई द्वारा 17 अगस्त 2022 को दर्ज की गई एफआईआर से हुई थी, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच शुरू की। इसी मामले में केजरीवाल को मुख्य आरोपी के तौर पर गिरफ्तार भी किया गया था, हालांकि वह फिलहाल सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत पर बाहर हैं। समन अवमानना मामले में बौरी होने के बाद आम आदमी पार्टी ने इस फैसले को ‘न्याय की जीत’ बताया है। राजनीतिक गलियारों में यह फैसला केंद्र और जांच एजेंसियों के लिए एक झटका माना जा रहा है, जिसने केजरीवाल की कानूनी स्थिति को और मजबूत कर दिया है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला न केवल केजरीवाल के लिए व्यक्तिगत राहत है, बल्कि यह समन प्रक्रिया, जांच एजेंसियों की कार्यशैली और अवमानना कानून के इस्तेमाल पर भी नई बहस शुरू कर सकता है।









