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लोकसभा में विपक्ष का प्रचंड हंगामा, राष्ट्रपति के अभिभाषण पर पीएम मोदी का जवाब टला

लोकसभा में विपक्ष का प्रचंड हंगामा

हाल ही में लोकसभा की कार्यवाही में सरकार और विपक्ष के बीच एक बड़ा गतिरोध देखने को मिला। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बहुप्रतीक्षित भाषण तय था, लेकिन सदन में विपक्षी सांसदों के तीखे विरोध और लगातार नारेबाजी के चलते कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा। इस हंगामे के कारण पीएम मोदी को बिना बोले ही लौटना पड़ा और उनका भाषण टल गया।

बुधवार शाम 5 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सदन में बोलना था। यह भाषण इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा था क्योंकि इसमें सरकार अपनी नीतियों, पिछले कार्यकाल के कामकाज और विपक्ष द्वारा उठाए गए ज्वलंत मुद्दों (जैसे महंगाई, रोजगार, और विकास) पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करने वाली थी। हालांकि, भाषण शुरू होने से ठीक पहले ही विपक्षी सांसदों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। देखते ही देखते सदन में इतना शोर मच गया कि कोई भी सदस्य अपनी बात ठीक से नहीं रख पाया। विपक्षी दल पहले अपनी मांगों पर चर्चा चाहते थे और सदन को चलने देने के लिए तैयार नहीं थे, जिसके कारण हालात बिगड़ गए।

हंगामे को शांत करने और कार्यवाही को सुचारू बनाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कई बार प्रयास किए। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे अपनी सीटों पर वापस लौटें और नियमों का पालन करें, साथ ही यह भी कहा कि इस हंगामे से देश का महत्वपूर्ण समय बर्बाद हो रहा है। माहौल को संभालने के लिए सरकार की ओर से भी बातचीत की कोशिश की गई। गृह मंत्री अमित शाह और संसदीय कार्य मंत्री ने लोकसभा अध्यक्ष के साथ मिलकर विपक्षी नेताओं से गतिरोध तोड़ने का आग्रह किया। सरकार ने बातचीत का आश्वासन दिया, लेकिन विपक्ष अपनी मांगों पर अड़ा रहा और कोई आम सहमति नहीं बन सकी।

गतिरोध न टूटने के कारण दिनभर में लोकसभा की कार्यवाही को तीन बार स्थगित करना पड़ा। बार-बार स्थगन के बाद भी जब हालात नहीं सुधरे, तो आखिरकार लोकसभा अध्यक्ष को पूरे दिन के लिए सदन स्थगित करने का कड़ा फैसला लेना पड़ा। इस वजह से उस दिन संसद में कोई भी महत्वपूर्ण चर्चा, विधेयक या राष्ट्र से जुड़ा अहम फैसला नहीं हो सका।

सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव साफ दिखाता है कि संसदीय कामकाज में तनाव गहरा है। देश की जनता चाहती है कि संसद बहस और समाधान का मंच बने, न कि हंगामे का अखाड़ा। देश की प्रगति के लिए आवश्यक है कि दोनों पक्ष मतभेदों को बातचीत से सुलझाएं।

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