माघ मेला को सनातन धर्म की रक्षा और विस्तार के लिए चिंतन का सबसे बड़ा मंच माना जाता है। हालांकि, हालिया घटनाक्रम में गोवर्धन पुरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने मेले में मौजूद अन्य धर्माचार्यों और शंकराचार्यों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनकी यह चिंता भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में खतरे में जी रहे सवा करोड़ सनातनी हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर है।
माघ मेले में अपने शिविर में मौजूद शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह धार्मिक अनुष्ठान और साधना का क्षेत्र होने के साथ-साथ दुनिया भर के हिंदू अनुयायियों की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास के विचार मंथन का भी सर्वाधिक उचित स्थान है।
स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ का कहना है कि बांग्लादेश में हर क्षण जिंदगी और मृत्यु की छाया में जी रहे सवा करोड़ सनातनी हिंदुओं की रक्षा के लिए माघ मेला में किसी धर्माचार्य या शंकराचार्य की जुबान नहीं खुल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई धर्मगुरु अपनी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं में उलझे हैं। शंकराचार्य ने कहा, “किसी को अपने छत्र सिंहासन की पड़ी है तो कोई अपनी पदवी के दावे तो किसी को अपनी पालकी की पड़ी है।” उनका कहना था कि ये सवा करोड़ सनातनी हिंदू किसी तरह अपने धर्म और मर्यादा की रक्षा करते आए हैं, लेकिन उनका जीवन गंभीर खतरे में है, जिस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है।
शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने सभी धर्म गुरुओं से आग्रह किया कि वे आपसी अहंकार और स्वार्थ को त्याग कर सनातनी बांग्लादेशी हिंदुओं की जान की रक्षा के लिए एकजुट होकर आवाज उठाएं। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने स्वयं भारत सरकार से बांग्लादेश जाने की इजाजत मांगी है और वह स्थिति का जायजा लेने के लिए जल्द ही वहां जाएंगे।
माघ मेले जैसे पवित्र मंच से बांग्लादेशी हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर उठी यह आवाज अब देश के धार्मिक और राजनीतिक गलियारों में एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गई है, जिस पर तुरंत ध्यान देने और सामूहिक कार्रवाई की आवश्यकता है।









