उत्तर प्रदेश के मथुरा जनपद के नौहझील ब्लॉक से एक बेहद शर्मनाक और संवेदनशील मामला सामने आया है। रामनगला पलखेड़ा गांव के पास स्थित गौशाला में भयानक लापरवाही और भुखमरी के चलते आधा दर्जन से अधिक गायों की दर्दनाक मौत हो गई। गौशाला परिसर में गायों के कंकाल जैसे शव मिलने से न केवल पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है, बल्कि गौ-वंश संरक्षण की जमीनी हकीकत पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बीते लगभग तीन महीनों से गौशाला में गायों को न तो समुचित चारा मिल रहा था और न ही उनकी उचित देखभाल की जा रही थी। हालात इतने बदतर हो चुके थे कि कई गायें धीरे-धीरे भूख और neglect से तड़पती रहीं और अंततः दम तोड़ बैठीं। ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें करने के बावजूद, गौशाला प्रबंधन या संबंधित प्रशासन ने समय रहते हस्तक्षेप करना जरूरी नहीं समझा।
इस पूरे मामले में ग्राम पंचायत रामनगला के प्रधान की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जिन पर गौशाला के संचालन में भारी लापरवाही बरतने का आरोप है। गौरतलब है कि यह गौशाला पहले भी कई बार विवादों में रही है। यह घटना तब सामने आई है जब उत्तर प्रदेश सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गौ-वंश संरक्षण को लेकर लगातार सख्त निर्देश देते रहे हैं, जिसमें सभी गौशालाओं में पर्याप्त चारा, पानी और चिकित्सा सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराने की बात कही गई है। रामनगला पलखेड़ा की यह घटना सरकारी आदेशों की खुली अवहेलना को दर्शाती है।
स्थानीय ग्रामीणों में इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, दोषियों— चाहे वे स्थानीय प्रशासन के हों या गौशाला संचालक— उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों ने गौशाला की व्यवस्थाओं की तत्काल समीक्षा कर गायों के लिए तत्काल चारा-पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की अपील की है।
मथुरा की यह दुखद घटना केवल लापरवाही का मामला नहीं है, बल्कि यह सवाल भी खड़ा करती है कि आखिर कागजों में चल रही गौ-संरक्षण योजनाएं ज़मीनी स्तर पर कब और कैसे सफलतापूर्वक उतरेंगी और इन निर्दोष पशुओं की जान बचाने की जिम्मेदारी कौन लेगा।









