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भीषण ठंड से राहत! मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने सड़कों पर सो रहे बेसहारा लोगों के लिए चलाया खास अभियान

मथुरा-वृंदावन में बेसहारा लोगों को ठंड से बचाने के लिए नगर निगम द्वारा चलाए जा रहे रैन बसेरा अभियान की तस्वीर।

उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है, और ऐसे मौसम में सड़कों पर रात गुजारना बेसहारा लोगों के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। इसी मानवीय ज़रूरत को देखते हुए, मथुरा-वृंदावन नगर निगम ने एक सराहनीय पहल शुरू की है। निगम ने सुनिश्चित किया है कि अब शहर में कोई भी व्यक्ति सड़कों पर ठिठुरता हुआ नजर नहीं आएगा, जिसके लिए एक विशेष बचाव और आश्रय अभियान चलाया जा रहा है।

इस पहल के तहत, नगर निगम मथुरा-वृंदावन द्वारा शहर में दो विशेष गाड़ियां दिन और रात चलाई जा रही हैं। इन गाड़ियों में नगर निगम की क्यूआर टीम (क्विक रिस्पांस टीम) तैनात है, जो सड़कों, फुटपाथों और सार्वजनिक स्थानों पर सो रहे गरीब और बेसहारा लोगों को ढूंढकर सुरक्षित रैन बसेरों तक पहुंचा रही है।

अक्सर देखने में आता था कि पहचान पत्र या आधार कार्ड न होने के कारण बेसहारा लोग कड़ाके की ठंड में भी सड़कों पर सोने को मजबूर थे। लेकिन इस बार नगर निगम ने इस बाधा को पूरी तरह खत्म कर दिया है। अब बिना किसी पहचान पत्र के भी लोगों को तुरंत रैन बसेरों में आश्रय दिया जा रहा है, ताकि ठंड से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

नगर निगम ने इस बार शहर में कुल 13 रैन बसेरों की व्यवस्था की है, जिनमें 5 स्थाई और 8 अस्थाई शेल्टर शामिल हैं। खास बात यह है कि ठंड से बेहतर बचाव के लिए टेंट की जगह टीन शेड वाले हाईटेक रैन बसेरे तैयार किए गए हैं। इन आश्रय स्थलों पर लोगों को मुफ्त भोजन, मुफ्त वाई-फाई, चेंजिंग रूम, लॉकर और वॉशरूम जैसी आधुनिक सुविधाएं भी दी जा रही हैं, जिससे बेसहारा लोग सम्मान और सुरक्षित माहौल में अपनी रात गुजार सकें।

नगर निगम का यह संवेदनशील और त्वरित कदम कड़ाके की ठंड के बीच गरीब और बेसहारा लोगों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है, यह प्रयास निश्चित रूप से अनुकरणीय है।

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