हिमालय की ग्लेशियल झीलों पर कैसे रखी जाती है नजर? सैटेलाइट से सर्वे तक की पूरी प्रक्रिया

हिमालय क्षेत्र में मौजूद खतरनाक ग्लेशियल झीलों पर सैटेलाइट तकनीक और आधुनिक सर्वे के जरिए किस तरह निगरानी रखी जाती है, आइए इसे विस्तार से समझें।

हिमालयी क्षेत्रों में ग्लोबल वार्मिंग के चलते ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिसके कारण कई नई झीलों का निर्माण हो रहा है या पुरानी झीलों का आकार लगातार बढ़ रहा है। इन झीलों पर समय रहते नजर रखना बेहद जरूरी होता है, ताकि किसी भी संभावित आपदा से बचा जा सके।

इन ग्लेशियल झीलों की निगरानी के लिए अंतरिक्ष से सैटेलाइट इमेजिंग का मुख्य रूप से इस्तेमाल किया जाता है। विभिन्न अंतरिक्ष एजेंसियों के उपग्रह लगातार इन पहाड़ी इलाकों की तस्वीरें लेते हैं, जिससे झीलों के क्षेत्रफल में होने वाले बदलावों और उनके जलस्तर पर बारीकी से नजर रखी जाती है।

सैटेलाइट डेटा के विश्लेषण के अलावा, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ जमीनी स्तर पर भी सर्वे करते हैं। कई बार दुर्गम इलाकों में पहुंचकर विशेषज्ञों की टीम झील के तटबंधों की मजबूती और पानी के दबाव का आकलन करती है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य समय रहते खतरे का अनुमान लगाना और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करना है।

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