मुंबई। Tata Sons के बोर्ड ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए N चंद्रशेखरन को कंपनी के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन के पद पर एक और 5 साल का कार्यकाल देने को मंजूरी दे दी। उनका मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में खत्म होना था। चंद्रशेखरन ने अगस्त में दोबारा चेयरमैन बनने की इच्छा नहीं जताई थी, लेकिन बोर्ड की अपील के बाद उन्होंने अपने फैसले पर दोबारा विचार किया।
बोर्ड ने इसके साथ ही Tata Sons को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की दिशा में कदम उठाने का भी फैसला किया है। यह फैसला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के उस रुख के बाद आया है, जिसमें Tata Sons को अपर लेयर NBFC के तौर पर लिस्टिंग नियमों का पालन करने को कहा गया है। 11 सितंबर को RBI ने Tata Sons की NBFC रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने की अपील को खारिज कर दिया था।
Tata Sons के बोर्ड ने चंद्रशेखरन के दोबारा चेयरमैन बनने के प्रस्ताव को बहुमत से मंजूरी दी। हालांकि, Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। Tata Trusts ने बाद में इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके अनुसार कंपनी के Articles of Association के तहत यह प्रस्ताव कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
Tata Sons में लिस्टिंग को लेकर शेयरधारकों के बीच लंबे समय से अलग-अलग राय रही है। Tata Trusts के पास कंपनी की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि Shapoorji Pallonji Group की हिस्सेदारी करीब 18.4 फीसदी है। लिस्टिंग के मुद्दे पर दोनों पक्षों की राय अलग रही है।
चंद्रशेखरन 2017 से Tata Sons के चेयरमैन हैं। इस साल अगस्त में उनके पद छोड़ने के फैसले के बाद नए चेयरमैन की तलाश की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी हुई थी। अब उनके पांच साल के नए कार्यकाल को मंजूरी मिलने के बाद यह प्रक्रिया फिलहाल आगे नहीं बढ़ने की स्थिति में है।
Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर आगे की प्रक्रिया RBI, Tata Trusts और अन्य संबंधित पक्षों से चर्चा के बाद तय की जाएगी। बोर्ड ने कहा है कि वह लागू RBI दिशानिर्देशों के पालन के लिए जरूरी कदम उठाएगा।