हैदराबाद स्थित प्रतिष्ठित नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) द्वारा जारी किए गए सर्कुलर पर भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI सूर्यकांत) ने सख्त रुख अपनाया और असंतोष जताया है।
CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट कहा कि अगर NALSAR के छात्र उनके खिलाफ या किसी भी मुद्दे पर विरोध दर्ज करा रहे हैं, तो BCI को इसमें हस्तक्षेप करने या छात्रों के भविष्य/करियर पर असर डालने वाली कोई कार्रवाई करने की जरूरत नहीं है।
मुख्य बातें और अदालत में हुई सुनवाई:
1. BCI का विवादित सर्कुलर वापस लिया गया
बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा की ओर से एक सर्कुलर जारी किया गया था, जिसमें NALSAR यूनिवर्सिटी में हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई और उनके बतौर वकील राज्य बार काउंसिल में नामांकन (Enrollment) पर असर पड़ने की बात कही गई थी।
जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष आया, तो BCI के वकील ने अदालत को सूचित किया कि बार काउंसिल ने उस सर्कुलर को वापस ले लिया है।
2. CJI ने साझा किया छात्र जीवन का अनुभव
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपने युवा दिनों को याद करते हुए कहा:
- “जब मैं खुद एक छात्र था, तब मैं भी कई सामाजिक और शैक्षणिक मुद्दों को लेकर काफी सक्रिय रहता था।”
- उन्होंने जोर देकर कहा कि अपनी बात या विचार रखने के लिए युवाओं और छात्रों पर कोई दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
3. “युवाओं को विरोध का हक, हम उन्हें कोर्ट में देखना चाहते हैं”
CJI सूर्यकांत ने छात्रों का समर्थन करते हुए कहा:
“अगर कोई कम उम्र का युवा हमारे विरोध में भी कोई बात कहता है या सवाल उठाता है, तो उसे ऐसा कहने की आजादी होनी चाहिए। हम चाहते हैं कि ये छात्र अपनी पढ़ाई पूरी कर जल्द से जल्द वकालत का लाइसेंस (Enrolment) हासिल करें, सुप्रीम कोर्ट आकर प्रैक्टिस करें और न्याय प्रणाली का हिस्सा बनें।”
4. करियर को प्रभावित करने वालों को करारा जवाब
CJI ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे युवा वकीलों को लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (Legal Services Authority) में काम करने का अवसर प्रदान करेगा, जो उन लोगों के लिए सबसे माकूल जवाब होगा जो छात्रों के करियर और वकालत के लाइसेंस को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।