पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होना है, लेकिन मतदान से पहले ही यहां सियासी हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को पश्चिम बंगाल पुलिस ने एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उस दिन हुई, जब ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे के नामांकन वापस लेने के बाद कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया था।
11 सितंबर को उम्मीदवार बने, 18 सितंबर को गिरफ्तार
कांग्रेस ने 11 सितंबर को मिलन प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार घोषित किया था। नंदीग्राम में 6 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी। चुनाव प्रचार के बीच 18 सितंबर को उनकी गिरफ्तारी ने चुनावी मुकाबले को और चर्चा में ला दिया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तारी 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या मामले में लंबित वारंट के आधार पर की गई। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि चुनावों के दौरान लंबित वारंट की समीक्षा की जाती है और मिलन प्रधान के खिलाफ एक वारंट लंबित मिला था। उन्हें शनिवार को स्थानीय अदालत में पेश किए जाने की बात कही गई थी।
कौन हैं मिलन प्रधान?
मिलन प्रधान नंदीग्राम के सोनाचूड़ा इलाके से आते हैं। वह 2007 के नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े रहे हैं। उस समय वाम मोर्चा सरकार की औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण की योजना के खिलाफ आंदोलन हुआ था।
मिलन प्रधान उस दौर में भूमि उच्छेद प्रतिरोध समिति (BUPC) से जुड़े नेताओं में शामिल थे। इस आंदोलन ने नंदीग्राम की राजनीति को बदलने में अहम भूमिका निभाई थी। रिपोर्टों के मुताबिक, उनके खिलाफ उस आंदोलन से जुड़े एक दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज रहे हैं।
पुराने मामलों में फिर क्यों हुई गिरफ्तारी?
मिलन प्रधान के खिलाफ 2007 के नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े कई मामले दर्ज होने की बात सामने आई है। इनमें हत्या से जुड़े मामले भी शामिल हैं। उनकी ओर से चुनावी हलफनामे में भी पुराने मामलों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, उनके खिलाफ कम से कम एक गिरफ्तारी वारंट लंबित था।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने नंदीग्राम आंदोलन से जुड़े मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया पर पहले रोक लगाई थी। इसके बाद पुराने मामलों में कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ने का रास्ता खुला। हालांकि, मौजूदा गिरफ्तारी को किसी खास पुराने मामले से जोड़ने से पहले आधिकारिक पुलिस विवरण का इंतजार जरूरी है।
ममता के समर्थन के बाद गिरफ्तारी पर सवाल
मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई जब कुछ घंटे पहले ही ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया था। ममता के गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद ममता ने कांग्रेस के मिलन प्रधान के समर्थन की घोषणा की।
कांग्रेस ने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता मिता चक्रवर्ती ने आरोप लगाया कि ममता के समर्थन के कुछ ही घंटे बाद मिलन प्रधान को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने इसे विपक्ष को राजनीतिक जगह नहीं देने और डराने-धमकाने की कार्रवाई बताया। ये कांग्रेस के आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ममता बनर्जी ने भी गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने पुराने मामले में अब कार्रवाई क्यों की गई।
पुलिस का क्या कहना है?
पुलिस की ओर से सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं बल्कि लंबित गिरफ्तारी वारंट के आधार पर की गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि चुनाव के दौरान पुराने लंबित वारंट की समीक्षा की जाती है और मिलन प्रधान के खिलाफ एक वारंट पाया गया था। पुलिस के मुताबिक, उन्हें अदालत में पेश किया जाना था।
हालांकि, गिरफ्तारी की सटीक कानूनी धाराओं और उस मामले की विस्तृत जानकारी को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। इसलिए इन विवरणों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
नंदीग्राम में अब क्या है चुनावी तस्वीर?
नंदीग्राम उपचुनाव का मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सीट पश्चिम बंगाल की राजनीति में काफी अहम मानी जाती है। 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम से जीत हासिल की थी और भवानीपुर सीट भी जीती थी। उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ने के बाद यहां उपचुनाव की स्थिति बनी।
अब कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है। एक तरफ ममता बनर्जी के गुट ने कांग्रेस को समर्थन दिया है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस गिरफ्तारी के समय और परिस्थितियों पर सवाल उठा रही है। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई लंबित वारंट के आधार पर हुई है। ऐसे में उपचुनाव से पहले इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर नजर बनी हुई है।