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अमेरिका के बिना यूरोप की सुरक्षा शून्य? नाटो प्रमुख मार्क रुटे की यूरोपीय संसद में दो टूक चेतावनी

अमेरिका के बिना यूरोप की सुरक्षा शून्य

यूरोप अगर यह सोचता है कि वह अमेरिका के सहयोग के बिना अपनी सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर सकता है, तो नाटो के शीर्ष नेतृत्व ने उसे सपनों की दुनिया से बाहर आने की दो टूक चेतावनी दी है। नाटो महासचिव मार्क रुटे ने हाल ही में यूरोपीय संसद को संबोधित करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका के बिना यूरोप सुरक्षित नहीं है। उनका यह कड़ा बयान ऐसे समय आया है जब गठबंधन के भीतर रक्षा खर्च और साझा सुरक्षा रणनीति को लेकर आंतरिक तनाव बढ़ा हुआ है।

नाटो महासचिव मार्क रुटे ने ब्रसेल्स में यूरोपीय संसद को बिल्कुल साफ शब्दों में संबोधित किया। उन्होंने कहा कि, अगर कोई सोचता है कि यूरोप अकेले अपनी रक्षा कर सकता है, तो वह सपना देखता रहे, क्योंकि यह मुमकिन नहीं है। रुटे की यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रक्षा खर्च न बढ़ाने वाले सदस्य देशों को सुरक्षा गारंटी से वंचित करने की धमकी देने के बाद नाटो में दरारें दिखने लगी थीं।

सुरक्षा की रीढ़: आर्टिकल 5 और अमेरिकी भागीदारी

नाटो की सबसे बड़ी ताकत उसका ‘आर्टिकल 5’ है, जिसके तहत किसी भी एक सदस्य देश पर हमला होने पर बाकी सभी 32 देश उसकी मदद के लिए बाध्य होते हैं। यह सामूहिक सुरक्षा की गारंटी है। मार्क रुटे ने स्पष्ट किया कि इस गारंटी की असली ताकत अमेरिका है। उसकी सैन्य शक्ति, उच्च तकनीक और सबसे महत्वपूर्ण, उसकी परमाणु सुरक्षा छाता (Nuclear Umbrella) ही वह आधार है जिस पर नाटो टिका हुआ है। अमेरिकी समर्थन के बिना, छोटे देशों के लिए वैश्विक महाशक्तियों के सामने खड़े होना असंभव होगा।

रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग: 5% भी काफी नहीं

जुलाई में हेग में हुए नाटो शिखर सम्मेलन में, अमेरिका के दबाव में यूरोप और कनाडा ने रक्षा खर्च बढ़ाने पर सहमति जताई। लक्ष्य तय किया गया कि 2035 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का 5% रक्षा पर खर्च किया जाएगा। हालांकि, रुटे ने यह भी कहा कि अगर यूरोप सचमुच अमेरिका के सहयोग के बिना आत्मनिर्भर बनना चाहता है, तो यह 5% भी काफी नहीं होगा। उन्होंने दो टूक कहा कि आत्मनिर्भरता के लिए जीडीपी का 10% खर्च करना होगा और यूरोप को अपनी खुद की परमाणु क्षमताएं बनानी होंगी। यह एक ऐसा कदम है जो अरबों यूरो का बोझ डालेगा और इसमें दशकों का समय लगेगा, फिर भी सफलता की कोई गारंटी नहीं है। रुटे का अंतिम संदेश पूरे यूरोप में गूंज गया: अगर अमेरिका नहीं रहा, तो हमारी आजादी की आखिरी गारंटी भी खत्म हो जाएगी।

मार्क रुटे का यह सीधा संदेश यूरोप के नीति निर्माताओं के लिए एक आईना है। उन्हें तय करना होगा कि वे मजबूत साझेदारी के साथ आगे बढ़ते हैं या अकेले चलने की बहुत बड़ी कीमत चुकाने को तैयार हैं। मौजूदा भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर में, सुरक्षा केवल सहयोग और साझा ताकत से ही संभव है, सपनों से नहीं।