भारतीय मूल की नवी पिल्लई को शांति का नोबेल, ट्रंप को नहीं मिला पुरस्कार

साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान हो गया है. दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं और भारतीय तमिल मूल की मानवाधिकार विशेषज्ञ एवं न्यायविद नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को इस साल के शांति नोबेल से सम्मानित किया गया है.
भारतीय मूल की नवी पिल्लई को मिला नोबेल प्राइज

साल 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान हो गया है. दक्षिण अफ्रीका में जन्मीं और भारतीय तमिल मूल की मानवाधिकार विशेषज्ञ एवं न्यायविद नवनेथम ‘नवी’ पिल्लई को इस साल के शांति नोबेल से सम्मानित किया गया है. नॉर्वे की नोबेल समिति ने उन्हें शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने में उनके योगदान के लिए चुना है. समिति ने युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार के मामलों में न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में उनके काम को भी रेखांकित किया है. इस घोषणा के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला, ऑपरेशन सिंदूर के बाद ट्रंप ने दावा कर रहे थे की उन्होंने 8 युद्ध रुकवाए है, जिसके कारण नोबेल पुरस्कार उन्हें मिलना चाहिए. लेकिन, इस साल का पुरस्कार नवी पिल्लई के नाम रहा.

कौन हैं नवी पिल्लई?

नवनेथम पिल्लई 85 वर्षीय न्यायाधीश हैं. उनका जन्म 1941 में दक्षिण अफ्रीका के डरबन में भारतीय तमिल मूल के परिवार में हुआ था. रंगभेद के दौर में पली-बढ़ीं पिल्लई ने कानून के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों का बचाव किया. वह दक्षिण अफ्रीका के नताल क्षेत्र में वकालत शुरू करने वाली पहली महिला बनीं, रंगभेद विरोधी आंदोलन के दौरान उन्होंने उन कार्यकर्ताओं के लिए भी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिन्हें उनके राजनीतिक विचारों और गतिविधियों के कारण निशाना बनाया गया था.

दक्षिण अफ्रीका से संयुक्त राष्ट्र तक का सफर

1995 में रंगभेद समाप्त होने के बाद पिल्लई दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुईं. इसके बाद उन्होंने रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण में न्यायाधीश के रूप में काम किया. इस दौरान नरसंहार से जुड़े मामलों में अंतरराष्ट्रीय न्याय के विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही. 1 सितंबर 2008 को उन्हें संयुक्त राष्ट्र का मानवाधिकार उच्चायुक्त नियुक्त किया गया. उन्होंने 2014 तक इस पद पर काम किया. अपने लंबे करियर में वह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय और अन्य अंतरराष्ट्रीय न्यायिक संस्थाओं से भी जुड़ी रहीं.

अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए सम्मान

नोबेल समिति के अनुसार, नवी पिल्लई ने अंतरराष्ट्रीय कानून को मजबूत करने और गंभीर अंतरराष्ट्रीय अपराधों के लिए जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में अहम योगदान दिया है, उनका काम इस बात पर जोर देता है कि युद्ध अपराधों, मानवता के खिलाफ अपराधों और नरसंहार जैसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों का पालन किया जाना चाहिए. नवी पिल्लई को मिला यह सम्मान मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे काम की वैश्विक मान्यता के रूप में देखा जा रहा है.

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