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राहुल-राम बयान पर विवाद

rahul ram

कांग्रेस नेता नाना पटोले के राहुल गांधी को भगवान श्रीराम से जोड़ने वाले बयान ने देश की राजनीति के साथ-साथ संत समाज में भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। यह बयान सामने आते ही चर्चा का विषय बन गया और अलग-अलग वर्गों से विरोध के स्वर सुनाई देने लगे। इस मामले में गुरुवार को नागपुर पहुंचे जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने खुलकर नाराजगी जताई और नाना पटोले के बयान को गलत बताया।

स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि भगवान श्रीराम की तुलना किसी भी राजनीतिक व्यक्ति से करना आस्था नहीं बल्कि चाटुकारिता है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि श्रीराम मर्यादा, त्याग और आदर्श के प्रतीक हैं, जबकि किसी नेता को उनसे जोड़ना करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाने जैसा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे जुगनू और सूर्य की तुलना नहीं हो सकती, वैसे ही श्रीराम और किसी नेता की तुलना भी नहीं की जा सकती।

स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने यह भी कहा कि जो लोग आज भगवान राम का नाम ले रहे हैं, वे उनके चरित्र और जीवन मूल्यों को सही मायने में समझ ही नहीं पाए हैं। उनके अनुसार भगवान राम का जीवन त्याग, कर्तव्य और सत्य के रास्ते पर चलने की सीख देता है, जिसे राजनीति से जोड़ना उचित नहीं है।

इसी बातचीत में उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में हिंदू समुदाय खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है, जो बेहद दुखद है। उन्होंने भारत सरकार से मांग की कि इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया जाए और हिंदुओं की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।

इस बयान के बाद बीजेपी की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई। बीजेपी नेता शहजाद पूनावाला ने नाना पटोले के बयान को हिंदू आस्था पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि जिस विचारधारा ने वर्षों तक भगवान राम को काल्पनिक बताया, राम मंदिर निर्माण का विरोध किया और धार्मिक आयोजनों का मजाक उड़ाया, वही आज राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से कर रही है। उनके अनुसार इस बयान से करोड़ों हिंदुओं की भावनाएं आहत हुई हैं और कांग्रेस को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।

दरअसल, नाना पटोले ने राहुल गांधी के राम मंदिर न जाने को लेकर उठे सवालों पर जवाब देते हुए कहा था कि भगवान राम सिर्फ मंदिरों में नहीं, बल्कि हर इंसान के दिल में बसते हैं। उन्होंने दावा किया था कि पीड़ितों और शोषितों की सेवा करना भगवान राम का मार्ग है और राहुल गांधी वही काम कर रहे हैं। इसी बयान के बाद विवाद और गहरा गया।

अब यह मामला सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक आस्था और भावनाओं से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है। लगातार आ रहे बयानों से साफ है कि राहुल-राम टिप्पणी पर सियासी और धार्मिक टकराव अभी थमने वाला नहीं है।