नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध-प्रदर्शन और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा है. गोयल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन अपने शासनकाल में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव आयोग के अधिकारियों को दिए गए राजनीतिक पदों के इतिहास को नजरअंदाज करती है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र रूप से काम करने की स्वायत्तता दी है.
‘कांग्रेस अपने पुराने रिकॉर्ड को नजरअंदाज कर रही है’
पीयूष गोयल ने कहा कि कांग्रेस को चुनाव आयोग पर सवाल उठाने से पहले अपने पुराने रिकॉर्ड पर गौर करना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों को चुनाव लड़ने का टिकट देने, राज्यसभा भेजने, केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने और राज्यपाल जैसे पदों पर नियुक्त करने के उदाहरण सामने आए हैं. इसके विपरीत, गोयल ने दावा किया कि मोदी सरकार में किसी भी चुनाव आयुक्त को राजनीतिक लाभ पहुंचाने के लिए पद नहीं दिया गया.
केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी के बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, जबकि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने आयोग को देशहित और जनहित में स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर दिया है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने अपने कार्यकाल में संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को कमजोर किया.
टीएन शेषन और एमएस गिल का दिया उदाहरण
पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस उनकी निष्पक्षता की प्रशंसा करती थी, लेकिन 1999 में उन्हें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए पार्टी का टिकट दिया गया. गोयल ने सवाल उठाया कि क्या यह किसी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त को राजनीतिक रूप से पुरस्कृत करने जैसा नहीं था.
उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का भी जिक्र किया. गोयल के मुताबिक, गिल 1996 से 2001 तक मुख्य चुनाव आयुक्त रहे और वर्ष 2000 में उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया. बाद में वह कांग्रेस में शामिल हुए, 2004 में राज्यसभा पहुंचे और 2008 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में मंत्री बनाए गए. गोयल ने इन घटनाओं को आधार बनाकर कांग्रेस पर चुनाव आयोग के पदों और अधिकारियों का राजनीतिक इस्तेमाल करने का आरोप लगाया.
टीकाराम मीणा और रतन यू. केलकर की नियुक्तियों पर भी उठाए सवाल
केंद्रीय मंत्री ने केरल के पूर्व मुख्य निर्वाचन अधिकारी टीकाराम मीणा और रतन यू. केलकर का भी उल्लेख किया. उन्होंने दावा किया कि चुनावी जिम्मेदारियां निभाने वाले अधिकारियों को बाद में राजनीतिक या प्रशासनिक पदों पर नियुक्त किया गया. गोयल ने इन उदाहरणों के आधार पर सवाल उठाया कि क्या ऐसी नियुक्तियां चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर संदेह पैदा नहीं करतीं.
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया पर क्या बोले गोयल?
चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया का जिक्र करते हुए पीयूष गोयल ने कहा कि पहले नियुक्तियों में केंद्र सरकार की प्रमुख भूमिका होती थी. उन्होंने दावा किया कि नरेंद्र मोदी सरकार ने 2023 में कानून बनाकर चयन प्रक्रिया में नेता प्रतिपक्ष को भी शामिल किया. गौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून के तहत चयन समिति में प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और प्रधानमंत्री द्वारा नामित एक केंद्रीय कैबिनेट मंत्री शामिल होते हैं. गोयल ने कहा कि इस व्यवस्था के तहत प्रधानमंत्री के साथ नेता प्रतिपक्ष भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा हैं.
SIR को लेकर भी कांग्रेस पर साधा निशाना
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर पीयूष गोयल ने कांग्रेस के आरोपों को बेबुनियाद बताया. उन्होंने शशि थरूर, रमेश चेन्नीथला, अधीर रंजन चौधरी और केरल के मुख्यमंत्री के बयानों का हवाला देते हुए दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेताओं ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया या SIR को लेकर सकारात्मक टिप्पणियां की हैं. गोयल ने सवाल उठाया कि यदि पार्टी के कुछ नेता चुनाव आयोग की प्रक्रिया की सराहना करते हैं, तो कांग्रेस नेतृत्व वोट चोरी के आरोप क्यों लगा रहा है. उन्होंने राहुल गांधी और कांग्रेस से अपने आरोपों के समर्थन में ठोस तथ्य पेश करने की मांग की.
फिलहाल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं. जहां कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा इन आरोपों को खारिज करते हुए कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड का हवाला दे रही है.