नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2026 को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। दोनों ने अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई पिछली बैठक के बाद दोनों देशों के रिश्तों में हुई प्रगति का स्वागत किया।
‘मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए’
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जोर दिया कि भारत और चीन को अपने संबंधों को रणनीतिक और दीर्घकालिक नजरिए से देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मौजूद मतभेदों को विवाद में बदलने से रोकना जरूरी है। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के संबंधों के लिए आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित के सिद्धांतों का पालन करने पर जोर दिया।
सीमा पर शांति को बताया जरूरी
पीएम मोदी ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों के लगातार विकास के लिए जरूरी आधार है। उन्होंने दोनों पक्षों से सीमा से जुड़े मौजूदा समझौतों और आपसी सहमतियों का पालन करने की जरूरत बताई। दोनों नेताओं ने व्यापक द्विपक्षीय संबंधों और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए सीमा विवाद के निष्पक्ष, उचित और पारस्परिक रूप से स्वीकार्य समाधान की दिशा में प्रतिबद्धता दोहराई।
लोगों की आवाजाही और सांस्कृतिक संबंध बढ़ाने पर जोर
बैठक में दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने सांस्कृतिक आदान-प्रदान, व्यावसायिक संबंधों और दोनों देशों के नागरिकों की आवाजाही को और बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया। इससे भारत-चीन संबंधों में केवल सरकारों के स्तर पर ही नहीं, बल्कि लोगों के बीच भी संपर्क मजबूत करने की कोशिश के संकेत मिलते हैं।
व्यापार घाटे और सप्लाई चेन पर भी हुई चर्चा
आर्थिक और व्यापारिक संबंधों को लेकर दोनों नेताओं ने एक-दूसरे की चिंताओं को दूर करने की जरूरत पर सहमति जताई। इसमें व्यापार असंतुलन और सप्लाई चेन से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के बाजारों में अधिक सार्थक और अनुमानित पहुंच सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया। इसके अलावा भारत और चीन ने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर समान हित वाले क्षेत्रों का विस्तार करने तथा साझा चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति जताई।
BRICS में चीन के समर्थन की PM मोदी ने की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की BRICS अध्यक्षता के लिए चीन के समर्थन और 2026 के BRICS शिखर सम्मेलन की सफलता में उसके योगदान की सराहना की। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है जब भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार के प्रयास जारी हैं और दोनों देश सीमा सहित कई मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं।
BRICS के लिए यह साल बेहद खास रहा: विदेश मंत्रालय
विदेश मंत्रालय की ओर से प्रेस ब्रीफिंग में सचिव सुधाकर दलेला ने कहा कि 2026 BRICS के लिए बेहद महत्वपूर्ण वर्ष रहा है। भारत ने जनवरी में चौथी बार BRICS की अध्यक्षता संभाली। इसी दौरान BRICS ने अपने संस्थागत सहयोग के 20 वर्ष पूरे किए।भारत ने अपनी अध्यक्षता के दौरान रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी पर आधारित थीम के तहत समूह के एजेंडे को आगे बढ़ाया।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और ‘मानवता सबसे पहले’ के सिद्धांत से प्रेरित होकर भारत ने BRICS सहयोग को अधिक व्यावहारिक, भविष्य की जरूरतों के अनुरूप और लोगों की प्राथमिकताओं से जोड़ने का प्रयास किया।
8 महीने में 350 से ज्यादा बैठकें
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान अलग-अलग मंत्रालयों, कार्य समूहों, कारोबारी मंचों और लोगों से जुड़ी गतिविधियों के तहत 350 से ज्यादा बैठकें और कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें कुछ बैठकें आमने-सामने हुईं, जबकि कुछ वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गईं। मंत्रालय के मुताबिक, इन गतिविधियों में BRICS के महत्व और ग्लोबल साउथ के साथ उसके बढ़ते जुड़ाव को भी सामने रखा गया।
UN और वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में सुधार पर जोर
BRICS नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों और विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने के समर्थन को दोहराया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय वित्तीय ढांचे में सुधार की जरूरत पर भी जोर दिया गया, ताकि विकासशील देशों और ग्लोबल साउथ की आवाज को अधिक मजबूती मिल सके। बैठक में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों और आर्थिक अनिश्चितताओं के प्रभाव पर भी चर्चा हुई। नेताओं ने संवाद, कूटनीति और मतभेदों के शांतिपूर्ण समाधान के महत्व को रेखांकित किया।
लोकल करेंसी में व्यापार पर क्या कहा?
विदेश मंत्रालय ने बताया कि BRICS में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार के निपटान यानी लोकल करेंसी सेटलमेंट को लेकर पहले से चर्चा चल रही है। इसे कोई नया विषय नहीं बताया गया। भारत का मानना है कि स्थानीय मुद्राओं में व्यापारिक लेनदेन से आपसी कारोबार में ट्रांजैक्शन कॉस्ट कम करने में मदद मिल सकती है। इसे मौजूदा वैश्विक भुगतान और सेटलमेंट सिस्टम के पूरक के तौर पर देखा जा रहा है।
दिल्ली घोषणा पत्र पर बनी सहमति
BRICS सम्मेलन के दौरान भारत की ओर से पेश किए गए नई दिल्ली घोषणा पत्र को सभी सदस्य देशों ने स्वीकार किया। इसे भारत की अध्यक्षता की एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा पत्र को लेकर कहा कि BRICS की बैठक सार्थक और रचनात्मक रही तथा इसमें सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता सामने आई। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि बदलती दुनिया की चुनौतियों का सामना पुराने संसाधनों और पुराने तौर-तरीकों से नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, 2026 का BRICS सम्मेलन भारत के लिए केवल एक बहुपक्षीय बैठक नहीं रहा। एक तरफ भारत ने ग्लोबल साउथ, आर्थिक सहयोग और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों को आगे बढ़ाया, वहीं दूसरी तरफ चीन, रूस और ईरान जैसे प्रमुख देशों के साथ द्विपक्षीय संवाद के जरिए अपनी कूटनीतिक भूमिका को भी मजबूत करने की कोशिश की।