पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन की तैयारियां तेज कर दी हैं. सितंबर में 117 विधानसभा क्षेत्रों से होकर निकली ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के बाद बीजेपी ने अब चुनावी रणनीति पर मंथन करना शुरू कर दिया है. पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव बीएल संतोष की अगुवाई में पंचकूला में दो दिवसीय बैठक आयोजना की गयी, जिसमें पंजाब बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
120 दिनों में संगठन को मजबूत करने पर फोकस
बीजेपी की कोशिश अब चुनाव से पहले पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की है. बैठक में बूथ स्तर तक पार्टी की स्थिति, स्थानीय मुद्दों, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और विधानसभा क्षेत्रों से मिले फीडबैक पर चर्चा की गई. बीजेपी ने अगस्त में ही संकेत दिया था कि वह पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. बीएल संतोष ने उस समय पार्टी कार्यकर्ताओं से संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दिया था.
‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ के बाद चुनावी रणनीति
बीजेपी की 13 दिवसीय नशा मुक्त पंजाब यात्रा 18 सितंबर से शुरू हुई थी और करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंची. 30 सितंबर को जालंधर में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की रैली के साथ इस अभियान का समापन हुआ. यात्रा के दौरान बीजेपी ने पंजाब में नशे के मुद्दे को प्रमुख राजनीतिक विषय के तौर पर उठाया. अब पार्टी इस अभियान के दौरान मिले फीडबैक को आगामी चुनावी रणनीति में शामिल करने की तैयारी कर रही है.
BL Santosh की बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा?
पंचकूला में हुई बैठक में संगठन की तैयारियों के साथ-साथ विधानसभा स्तर पर पार्टी की स्थिति और स्थानीय राजनीतिक समीकरणों की समीक्षा की गई. रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व ने जमीनी स्तर की चुनौतियों, संगठनात्मक कमियों और अगले चरण की रणनीति पर चर्चा की. बीजेपी का जोर राज्य में अपने संगठनात्मक नेटवर्क को विस्तार देने और ज्यादा से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में सक्रिय कैडर तैयार करने पर है.
2027 चुनाव से पहले बढ़ेगी राजनीतिक सक्रियता
पंजाब विधानसभा का मौजूदा कार्यकाल मार्च 2027 में समाप्त होना है और विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं. ऐसे में राजनीतिक दलों ने संगठन और चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं. बीजेपी के लिए आगामी महीनों में बूथ स्तर की तैयारी, उम्मीदवारों की संभावित पहचान, स्थानीय मुद्दों और संगठन के विस्तार पर फोकस महत्वपूर्ण रहेगा। पार्टी की हालिया गतिविधियों से साफ है कि अब उसका जोर राज्यव्यापी अभियान को चुनावी संगठन में बदलने पर है.