Aam Aadmi Party में एक बार फिर अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। राज्यसभा सांसद Raghav Chadha को उपनेता पद से हटाए जाने के बाद पार्टी के भीतर तनाव बढ़ गया है। लंबे समय से यह देखा भी जा रहा था कि राघव चड्ढा पार्टी के मुख्य आयोजनों और अरविंद केजरीवाल के चुनाव प्रचार से गायब थे। यहां तक कि शराब नीति मामले में केजरीवाल को मिली राहत पर भी उन्होंने कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया। पार्टी के भीतर एक गुट ये मानता है कि जब नेतृत्व संकट में था, तब राघव ने संसद में उस तरह शोर नहीं मचाया जैसा अन्य नेताओं ने किया। विपक्षी दल इसे राघव चड्ढा की बीजेपी से बढ़ती नजदीकी और आम आदमी पार्टी में मचे घमासान के रूप में देख रहे हैं। हालांकि, राघव चड्ढा 2028 तक सांसद बने रहेंगे, लेकिन उपनेता का पद छिनने से पार्टी में उनके कद पर बड़ा असर पड़ा है।
अशोक मित्तल को जिम्मेदारी, चड्ढा की दूरी बनी वजह
आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में अब अशोक मित्तल पर भरोसा जताया है। राघव चड्ढा को पद से हटाने के साथ ही उन्हें पार्टी के स्टार प्रचारकों की लिस्ट से भी बाहर कर दिया गया है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि राघव चड्ढा पिछले काफी समय से सिर्फ पॉलिसी से जुड़े व्यक्तिगत मुद्दों पर ध्यान दे रहे थे और पार्टी के कोर मुद्दों पर चुप थे विशेषकर अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के दौरान उनकी लंबी अनुपस्थिति और चुप्पी ने हाईकमान को नाराज कर दिया था।
‘खामोश किया गया हूं, हारा नहीं हूं’
पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अपनी नाराजगी भावुक अंदाज में जाहिर की। उन्होंने कहा, “मुझे खामोश करवाया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं। यह मेरा आम आदमी के लिए संदेश है।”
जनता के मुद्दे उठाना क्या अपराध?
राघव चड्ढा ने सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने संसद में हमेशा आम जनता से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने पूछा, “क्या ऐसे मुद्दों को उठाना अपराध है? क्या मैंने कोई गलती की है?”
बोलने पर रोक को लेकर राघव चड्डा का सवाल
राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से उनके बोलने पर रोक लगाने की बात कही है। उन्होंने कहा कि आखिर उन्हें बोलने से क्यों रोका जा रहा है, जबकि वे महंगाई, टोल टैक्स, बैंक चार्ज और डिलीवरी वर्कर्स जैसे मुद्दों पर आवाज उठाते रहे हैं।
शायराना अंदाज में राघव चड्डा ने AAP पर साधा निशाना
राघव चड्ढा ने अपने बयान में शायराना अंदाज अपनाते हुए कहा- “मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझना, मैं वो दरिया हूं जो वक्त आने पर सैलाब बनता है।” उन्होंने जनता से समर्थन बनाए रखने की अपील भी की।
विपक्ष ने भी उठाए सवाल
इस पूरे मामले पर अन्य राजनीतिक दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता रामवीर सिंह बिधूरी ने कहा कि राघव चड्डा अच्छे वक्ता रहे हैं। अगर आम आदमी पार्टी उन्हे बोलने से रोकना चाहती है तो यह पूरी तरह से तानाशाही है। उन्होंने कहा, मैं अरविंद केजरीवाल से पूछता हूं कि उनकी पार्टी में लोकतंत्र बचा है या नहीं। अगर आप नेतृत्व इस तरह के फैसले लेता है तो इसकी निंदा होनी चाहिए। किसी सांसद को बोलने से रोकना ठीक नहीं है। कांग्रेस नेता मालूर वि ने कहा कि यह पार्टी लोकतांत्रिक मर्यादाओं को तार-तार कर रही है।
अब देखना यह होगा कि क्या राघव चड्ढा पार्टी में अपनी जगह वापस बना पाएंगे या यह उनके अलग होने की शुरुआत है।








