Lithium Found In Rajasthan : राजस्थान के नागौर ज़िले के डेगाना इलाके की रेवंत पहाड़ियों में लिथियम का एक विशाल भंडार खोजा गया है, जिसे अब तक का देश का सबसे बड़ा भंडार माना जा रहा है। इस खोज को भारत की ऊर्जा और तकनीकी ज़रूरतों के लिए एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है, खासकर तब जब देश लिथियम की भारी मात्रा चीन से आयात करता है।
इस नई खोज के साथ केंद्र सरकार ने इसके व्यावसायिक दोहन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए खनन अधिकारों की नीलामी प्रक्रिया आरंभ कर दी है। खान मंत्रालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, निविदा दस्तावेज़ 23 सितंबर से बिक्री के लिए उपलब्ध होंगे और इच्छुक कंपनियाँ 1 दिसंबर 2025 तक आवेदन कर सकेंगी।
देश की मांग का 80% पूरा करने की क्षमता
भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण के आँकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब 14 मिलियन टन लिथियम मौजूद होने का अनुमान है। यह मात्रा भारत की मौजूदा लिथियम आवश्यकताओं का लगभग 80 प्रतिशत पूरा करने में सक्षम हो सकती है। इस खोज के बाद भारत के लिए लिथियम आयात पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक ठोस आधार तैयार हो गया है।
रणनीतिक और आर्थिक दोनों लिहाज़ से अहम
लिथियम को वैश्विक स्तर पर ‘व्हाइट गोल्ड’ के नाम से जाना जाता है क्योंकि इसका उपयोग मोबाइल, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक वाहनों और रिचार्जेबल बैटरियों के निर्माण में होता है। इसके साथ ही परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में भी लिथियम की भूमिका अहम मानी जाती है। आने वाले वर्षों में भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों का दायरा तेज़ी से बढ़ने वाला है, ऐसे में लिथियम का घरेलू उत्पादन देश की रणनीतिक स्थिति को भी मज़बूत करेगा।
इस परियोजना से न केवल देश को विदेशी आयात पर निर्भरता से मुक्ति मिलेगी, बल्कि राजस्थान के स्थानीय स्तर पर भी राजस्व और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
पहले टंगस्टन के लिए प्रसिद्ध थीं रेवंत पहाड़ियां
डेगाना की ये पहाड़ियाँ खनिज संसाधनों के लिहाज़ से पहले भी चर्चा में रह चुकी हैं। 1914 में ब्रिटिश शासन के दौरान यहाँ टंगस्टन की खोज हुई थी और उस समय उत्पादित टंगस्टन का इस्तेमाल प्रथम विश्व युद्ध में ब्रिटिश सेना द्वारा किया गया था। बाद में खनन कार्य बंद हो गया, लेकिन अब लिथियम के रूप में इन पहाड़ियों की खनिज संपदा एक बार फिर सामने आई है।
देशभर में अन्य संभावनाएँ भी मौजूद
नागौर के अलावा भारत के कई और राज्यों में भी लिथियम के भंडार की पुष्टि या संभावनाएँ जताई जा चुकी हैं। जम्मू-कश्मीर के रियासी ज़िले में सलाल-हैमाना क्षेत्र में 5.9 मिलियन टन का भंडार मिला है, जबकि छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में देश की पहली लिथियम खदान की नीलामी हो चुकी है। कर्नाटक के मांड्या में भी 14,100 टन लिथियम की मौजूदगी पाई गई है। बिहार, ओडिशा, झारखंड, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और गुजरात में भी संभावित भंडारों की तलाश की जा रही है, हालाँकि इन स्थानों पर खनन कार्य अभी शुरू नहीं हो सका है।
राजस्थान के डेगाना में मिला यह लिथियम भंडार भारत के ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है। यह न केवल तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में मज़बूत कदम है, बल्कि देश की रणनीतिक और आर्थिक स्थिति को भी सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभा सकता है।
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