राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में अब जांच का फोकस आरोपियों की संपत्तियों, सोना-चांदी और नकदी की रिकवरी पर है, जबकि एसआईटी पूरे नेटवर्क और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में उत्तर प्रदेश सरकार और जांच एजेंसियों ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और तेज कर दी है, अब केवल गिरफ्तारी तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि चोरी की गई रकम की पूरी वसूली करने की तैयारी भी शुरू हो गई है। जांच एजेंसियां नगदी, संपत्तियों, सोना-चांदी और अन्य अवैध रूप से अर्जित परिसंपत्तियों के जरिए नुकसान की भरपाई कराने की योजना पर काम कर रही हैं।
रिकवरी के लिए तैयार हो रहा कानूनी प्लान
राम मंदिर चढ़ावा घोटाले में अब तक आठ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इस बीच मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा से भी पूछताछ की जा चुकी है, मामले की जांच कर रही एसआईटी का कार्यकाल भी 15 दिन के लिए बढ़ा दिया गया है ताकि पूरे नेटवर्क की पड़ताल की जा सके, जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी की गई रकम कहां खर्च की गई, किन-किन संपत्तियों में निवेश किया गया और कितनी राशि अब भी बरामद की जा सकती है।
संपत्तियों का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड
पुलिस आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा जुटा रही है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि मंदिर से जुड़े रहने के दौरान किन आरोपियों की संपत्ति में असामान्य बढ़ोतरी हुई, एसआईटी के मुताबिक, शुरुआती जांच में कई आरोपियों की संपत्ति में उल्लेखनीय इजाफा सामने आया है, अब इन संपत्तियों के स्रोत की जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं इन्हें चढ़ावे की रकम से तो नहीं खरीदा गया।
बीएनएसएस की धारा 107 के तहत होगी कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, रिकवरी की कार्रवाई अब पुराने गैंगस्टर एक्ट की प्रक्रिया के बजाय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 107 के तहत की जा सकती है, इस प्रावधान के तहत अपराध से अर्जित संपत्तियों को जब्त कर पीड़ित संस्था के नुकसान की भरपाई करने का प्रावधान है, बताया जा रहा है कि इसी तरह की कार्रवाई पहले रायबरेली में भी की जा चुकी है और अब अयोध्या पुलिस भी इसी कानूनी व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकती है।
सोना-चांदी और नकदी की भी तलाश
जांच एजेंसियां केवल नकदी ही नहीं, बल्कि मंदिर के चढ़ावे में आए सोना-चांदी और अन्य कीमती सामान की भी तलाश कर रही हैं, आरोपियों द्वारा छिपाई गई संपत्तियों और बहुमूल्य वस्तुओं की बरामदगी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है, पुलिस यह भी आकलन कर रही है कि कुल कितनी रकम और कीमती सामान की हेराफेरी हुई, ताकि उसी आधार पर रिकवरी की कार्रवाई की जा सके।
जांच के घेरे में आए कई और कर्मचारी
जांच के दौरान आठ गिरफ्तार आरोपियों के अलावा पांच अन्य गणनाकर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, उनसे लगातार पूछताछ की जा रही है और सबूत मिलने पर उनकी गिरफ्तारी भी हो सकती है, इसके अलावा गणना कक्ष के बाहर तैनात निजी सुरक्षा कर्मियों से भी पूछताछ की गई है, अब तक पुलिस 50 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
लंबे समय तक एक ही कर्मचारियों की तैनाती पर सवाल
जांच में यह भी सामने आया है कि जहां मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिस, एसएसएफ, पीएसी और सीआरपीएफ के जवानों की ड्यूटी हर 15 दिन में बदली जाती थी, वहीं चढ़ावे की गणना करने वाले कई कर्मचारी एक-दो साल से लगातार उसी जिम्मेदारी पर बने रहे, बताया जा रहा है कि ड्यूटी लगाने का जिम्मा गणना प्रभारी सुभाष और टिन्नू यादव के पास था, जिसकी वजह से एक ही लोगों की तैनाती बनी रही। जांच एजेंसियां इसी पहलू को भी हेराफेरी की संभावित वजह मानकर जांच कर रही हैं।
कंट्रोल रूम प्रभारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
मंदिर के कंट्रोल रूम प्रभारी अर्जुन देव भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं। वह करीब 17 वर्षों तक अयोध्या में तैनात रहे और कैमरों की निगरानी की जिम्मेदारी उनके पास थी। सूत्रों के मुताबिक, उनका कई बार तबादला हुआ, लेकिन हर बार रुकवा दिया गया, अब जांच इस बात की भी हो रही है कि सुरक्षा व्यवस्था में कोई लापरवाही हुई या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत थी। एसआईटी इन सभी पहलुओं की जांच कर अंतिम रिपोर्ट तैयार कर रही है।


