सोशल मीडिया के दौर में इन दिनों कई पुराने और पारंपरिक गाने अचानक वायरल हो जाते हैं। ऐसा ही एक पंजाबी लोकगीत ‘रातां लंबियां कालियां नी समिए’ इन दिनों इंटरनेट पर छाया हुआ है। इस गाने को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और रील्स बना रहे हैं। लेकिन क्या आपके मन में यह सवाल आया कि इस गाने में बार-बार जिस ‘सममी’ का जिक्र होता है, वह असल में कौन है?
पारंपरिक पंजाबी लोकगीतों में ‘सममी’ एक बेहद महत्वपूर्ण और प्रसिद्ध चरित्र रहा है। पंजाब के बार क्षेत्र (अब पाकिस्तान में) का यह एक बेहद लोकप्रिय लोकगीत है, जो एक दर्दनाक प्रेम कहानी से जुड़ा हुआ है।
लोक कथाओं के अनुसार, सममी नाम की एक राजकुमारी थी, जिसका प्रेम प्रसंग ढोला नाम के राजकुमार से चल रहा था। लेकिन किन्हीं पारिवारिक या सामाजिक कारणों से दोनों को अलग होना पड़ा। सममी अपने प्रेमी के वियोग में हमेशा रातभर जागकर उसका इंतजार करती थी और उसकी याद में गाती थी। इसी दर्द और इंतजार को बयां करते हुए यह लोकगीत तैयार हुआ।
सममी सिर्फ एक गाना या किरदार नहीं है, बल्कि पंजाब का एक पारंपरिक लोक नृत्य भी है। महिलाएं और युवतियां गोल घेरा बनाकर ताली बजाते हुए सममी गीत गाती हैं और नाचती हैं। यह नृत्य मुख्य रूप से महिलाओं के दर्द, उनके वियोग और भावनाओं को व्यक्त करने का एक माध्यम रहा है।
आज भले ही यह गाना आधुनिक संगीत शैली में रीक्रिएट होकर वायरल हो रहा हो, लेकिन इसकी जड़ें पंजाब की समृद्ध संस्कृति और पुरानी लोकगाथाओं से जुड़ी हुई हैं।