केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष को चुनौती दी है. उन्होंने कहा कि सरकार संसद में इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है. विपक्ष यदि SIR पर बहस करना चाहता है तो उसे संसद की कार्यवाही बाधित करने के बजाय सदन चलने देना चाहिए. शाह ने स्पष्ट किया कि सरकार इस विषय पर अपनी बात रखने के लिए तैयार है.
अमित शाह मंगलवार, 3 नवंबर को छत्तीसगढ़ के राज्योत्सव के समापन समारोह में शामिल होने अटल नगर-नवा रायपुर पहुंचे थे. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे. समारोह के दौरान गृह मंत्री ने SIR के मुद्दे के साथ छत्तीसगढ़ के गठन, विकास, नक्सलवाद के खिलाफ अभियान और प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत पर भी अपनी बात रखी.
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दिया. उन्होंने कहा कि साल 2000 में अटल जी ने छत्तीसगढ़ का गठन किया था. उस समय इस क्षेत्र के साथ अन्याय हो रहा था और विकास की रफ्तार थमी हुई थी. अलग राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ को अपनी स्वतंत्र पहचान मिली. शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने का काम किया जा रहा है.
गृह मंत्री ने कहा कि आज छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होकर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है. यह राज्य के लिए गौरव, उपलब्धि और संकल्प का अवसर है. उन्होंने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों के योगदान की सराहना की. शाह ने कहा कि नक्सल मुक्त छत्तीसगढ़ और नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य हासिल करने में सुरक्षाबलों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही है.
इस दौरान अमित शाह ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने हमेशा असंवैधानिक सरकारों और सांसदों का समर्थन किया है. शाह ने कहा कि जिन क्षेत्रों में जनता की ओर से चुनी हुई सरकार नहीं थी, वहां नक्सलियों ने अपना अलग गृह मंत्री, मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री बना रखा था. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस संविधान ने नक्सलियों को इस तरह की सरकार चलाने का अधिकार दिया था?
गृह मंत्री ने आरोप लगाया कि नक्सलियों ने कई निर्दोष पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और छात्रों की हत्या की और उन्हें पेड़ों पर लटकाकर फांसी दी. उन्होंने राहुल गांधी पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह संसद में ऐसे लोगों और व्यवस्थाओं का समर्थन करते हैं.
अमित शाह ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और लोक परंपराओं का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि गुरु घासीदास और गुरु नानक देव के संदेशों में समानता, सेवा और सत्य का भाव है, जो प्रदेश की परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है. उन्होंने लोक संस्कृति को संरक्षित रखने और उसे आगे बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार के प्रयासों की सराहना की.
शाह ने छत्तीसगढ़ पंडुम, बस्तर ओलंपिक, पंथी, पंडवानी, राउत नाचा, करमा और सैला जैसे लोकनृत्यों और सांस्कृतिक आयोजनों का जिक्र किया. इसके अलावा ढोकरा कला, बेल मेटल, कास्ट क्राफ्ट और कोसा को प्रदेश की विशिष्ट पहचान बताया. उन्होंने बस्तर दशहरा की 75 दिनों तक चलने वाली अनूठी परंपरा का भी उल्लेख किया.
गृह मंत्री ने कहा कि अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ को अलग राज्य की पहचान दी थी. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकसित छत्तीसगढ़ बनाने का संकल्प पूरा करने की दिशा में काम किया जा रहा है.


