नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक द्वारा 26 दिन बाद अनशन समाप्त किए जाने पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अगर अनशन खत्म करना ही था, तो उसे उसी जगह पर करना चाहिए था, जहां से पुलिस उन्हें हटाकर ले गई थी। राउत का मानना है कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के बीच अनशन समाप्त करने से आंदोलन को और मजबूती मिलती।
‘जंतर-मंतर पर अनशन तोड़ते तो और बड़ा संदेश जाता’
संजय राउत ने कहा कि 26 दिनों तक अनशन पर रहना आसान नहीं है और सोनम वांगचुक का जीवन देश के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्रियों के हाथों अनशन समाप्त करने के बजाय जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों और प्रदर्शनकारियों के बीच यह फैसला लिया जाना चाहिए था।
राउत ने कहा, “अगर अनशन तोड़ना ही था, तो उसी जगह पर तोड़ना चाहिए था, जहां से पुलिस उन्हें खींचकर ले गई थी। हजारों छात्रों के बीच अपनी बात रखकर अनशन खत्म करते, तो उसका संदेश और प्रभाव दोनों बड़े होते।”
‘सरकार ने आंदोलन को दबाने में कोई कसर नहीं छोड़ी’
संजय राउत ने केंद्र सरकार पर आंदोलन को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर बल प्रयोग किया गया और कई लोग घायल हुए।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से जबरन हटाया और बाद में सरकार के दो मंत्री उनके पास पहुंचे, जिनके हाथों उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया। राउत ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
‘आंदोलन को विपक्ष का भी मिला समर्थन’
राउत ने कहा कि इस आंदोलन को विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला है। उनके मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी, शिवसेना (यूबीटी), समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी नेताओं ने छात्रों के मुद्दे का समर्थन किया है।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के नेतृत्व में भी आंदोलन चल रहा है, जबकि अखिलेश यादव और डिंपल यादव ने भी प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है।
‘धर्मेंद्र प्रधान और पीएम मोदी के इस्तीफे की मांग जारी’
संजय राउत ने कहा कि उनकी पार्टी अब भी शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग पर कायम है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या अनशन समाप्त होने के बाद भी ये मांगें उसी मजबूती से उठाई जाएंगी।
‘इस आंदोलन का कोई एक नेता नहीं’
राउत ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं है, बल्कि छात्रों का आंदोलन है। उनके मुताबिक, “इस आंदोलन का कोई एक नेता नहीं है, बल्कि हर छात्र इसका नेतृत्व कर रहा है।” उन्होंने कहा कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।