भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने हाल ही में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के बढ़ते प्रभाव पर एक बेहद तीखी टिप्पणी करके पूरे क्रिकेट जगत में हलचल मचा दी है। एक याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि कई बार ऐसा लगता है, जैसे “पूँछ कुत्ते को हिला रही है।” यह मामला BCCI की टीम को ‘भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम’ (Team India) कहे जाने के अधिकार को चुनौती देने से जुड़ा था, जिसे कोर्ट ने समय की बर्बादी मानते हुए सिरे से खारिज कर दिया।
याचिका में मुख्य रूप से यह मांग की गई थी कि BCCI एक निजी संस्था है, इसलिए उसे अपनी टीम को ‘भारतीय राष्ट्रीय क्रिकेट टीम’ या ‘Team India’ कहने का अनुमति नहीं होनी चाहिए। हालांकि, कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए BCCI के राष्ट्रीय महत्व पर मुहर लगाई।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमलिया बागची की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि BCCI के पास इतना पैसा और इतना प्रभाव है कि आज खेल पर उसका नियंत्रण कुछ उल्टा लग रहा है, जैसे कुत्ते का पूँछ ही उसे हिला रही है (पूँछ कुत्ते को हिला रही है)। इसका अर्थ यह था कि बोर्ड का प्रभाव खेल के सामान्य नियंत्रण से कहीं अधिक असंतुलित हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को फटकार लगाते हुए कहा कि ऐसी याचिकाओं से कोर्ट का कीमती समय बर्बाद होता है, क्योंकि लोग बिना किसी ठोस आधार के घर बैठकर याचिकाएं तैयार कर देते हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अब खेल से संबंधित विवादों के समाधान के लिए नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल (National Sports Tribunal) भी उपलब्ध है, जिसका उपयोग करना अधिक उचित है।
याचिका में यह तर्क भी दिया गया था कि BCCI को सरकार से कोई सीधा फंड नहीं मिलता, इसलिए वह राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व का दावा नहीं कर सकता। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को अस्वीकार कर दिया और कहा कि BCCI को देश का पूरा समर्थन मिलता है और इसका राष्ट्रीय क्रिकेट पर नियंत्रण कानूनी रूप से मान्य है। गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने भी इससे पहले इसी तरह की याचिका को खारिज किया था।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि BCCI की आधिकारिक स्थिति और अधिकारों को देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था से मान्यता प्राप्त है, और बोर्ड का भारतीय क्रिकेट पर नियंत्रण वैध माना जाता रहेगा।









