महीनों की राजनीतिक उथल-पुथल और अस्थिरता के बाद, आज बांग्लादेश में एक नया ऐतिहासिक अध्याय शुरू होने जा रहा है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के उत्तराधिकारी और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के चेयरमैन तारिक रहमान आज देश के नए प्रधानमंत्री के तौर पर पद और गोपनीयता की शपथ लेने वाले हैं। इस ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन पर न सिर्फ दक्षिण एशिया, बल्कि पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
60 वर्षीय तारिक रहमान ने पिछले सप्ताह हुए 13वें संसदीय चुनावों में अपनी पार्टी को मिली प्रचंड जीत के बाद सत्ता की बागडोर संभाली है। इस चुनाव में उनकी पार्टी (BNP), जिसका चुनाव चिन्ह ‘धान की बाली’ है, ने 297 में से 209 सीटें जीतकर एक तरफा बहुमत हासिल किया। खास बात यह है कि यह जीत अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन और बांग्लादेश द्वारा देखे गए लंबे अस्थिर दौर के बाद आई है। इस चुनाव में दक्षिणपंथी जमात-ए-इस्लामी ने भी 68 सीटें जीतकर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। सबसे बड़ा परिवर्तन यह है कि करीब साढ़े तीन दशक बाद बांग्लादेश को कोई ‘पुरुष प्रधानमंत्री’ मिल रहा है, क्योंकि 1991 के बाद से अब तक सत्ता की कमान सिर्फ बेगम खालिदा जिया या शेख हसीना के पास ही रही थी।
शपथ ग्रहण समारोह में बड़ा बदलाव
इस बार शपथ ग्रहण समारोह की परंपरा में भी बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। दशकों से राष्ट्रपति भवन ‘बंगभवन’ में होने वाला यह कार्यक्रम अब संसद परिसर के ‘साउथ प्लाजा’ में जनता के बीच आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की रूपरेखा के मुताबिक, सुबह 10 बजे सांसदों का शपथ ग्रहण संपन्न होगा, जिसके बाद संसदीय दल के नेता के चुनाव के लिए BNP की अहम बैठक बुलाई गई है। फिर शाम ठीक 4 बजे राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन नई कैबिनेट को शपथ दिलाएंगे।
भारत की कूटनीतिक उपस्थिति
इस ऐतिहासिक पल का गवाह बनने के लिए भारत की ओर से एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ढाका पहुंच रहा है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला खुद इस समारोह में शामिल होंगे। उनके साथ विदेश सचिव विक्रम मिस्री और लोकसभा महासचिव उत्पल कुमार सिंह की मौजूदगी यह दर्शाती है कि भारत अपने इस पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्तों को कितनी अहमियत दे रहा है।
अब जबकि मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, पूरी दुनिया की नजरें तारिक रहमान की विदेश नीति और भारत के साथ उनके आगामी संबंधों पर टिकी हैं। देखना होगा कि ‘रहमान राज’ में दक्षिण एशिया की राजनीति किस नई दिशा में कदम बढ़ाती है।









