नई दिल्ली: बच्चे के जन्म के समय गर्भनाल (Umbilical Cord) में कुछ खून बचा रहता है। इस खून को Cord Blood कहा जाता है। इसमें स्टेम सेल मौजूद होते हैं, जिनका इस्तेमाल कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है। इसी वजह से कुछ माता-पिता बच्चे के जन्म के बाद Cord Blood को सुरक्षित रखने का विकल्प चुनते हैं।
क्या होता है Cord Blood Banking?
बच्चे के जन्म के बाद गर्भनाल को क्लैंप करके काटने के बाद उसमें बचा खून निकाला जाता है। इसे एक विशेष प्रक्रिया के जरिए इकट्ठा करके Cord Blood Bank में सुरक्षित रखा जाता है।
इस खून में मौजूद स्टेम सेल अलग-अलग प्रकार की रक्त कोशिकाओं में विकसित हो सकते हैं। इनका इस्तेमाल स्टेम सेल ट्रांसप्लांट में किया जाता है।
किन बीमारियों में हो सकता है इस्तेमाल?
Cord Blood से मिलने वाले स्टेम सेल का इस्तेमाल कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज में किया जा सकता है। इनमें शामिल हैं:
- ल्यूकेमिया जैसे कुछ कैंसर
- लिम्फोमा
- बोन मैरो से जुड़ी कुछ बीमारियां
- सिकल सेल बीमारी जैसी कुछ एनीमिया संबंधी स्थितियां
- कुछ इम्यून सिस्टम संबंधी बीमारियां
इसके अलावा डायबिटीज और पार्किंसन जैसी अन्य बीमारियों में भी Cord Blood की संभावित भूमिका पर शोध जारी है।
Cord Blood Banking कितने तरह की होती है?
Cord Blood को मुख्य रूप से दो तरह के बैंक में रखा जा सकता है—Public Bank और Private Bank।
Public Cord Blood Bank
Public Bank में माता-पिता बच्चे का Cord Blood दान करते हैं। इसके बाद यह किसी ऐसे मरीज के काम आ सकता है जिसे स्टेम सेल ट्रांसप्लांट की जरूरत हो और जिसका मैच मिल जाए।
कुछ अस्पतालों में Public Banking के लिए दान करना मुफ्त होता है, हालांकि हर अस्पताल यह सुविधा उपलब्ध नहीं कराता।
Private Cord Blood Bank
Private Bank में Cord Blood को परिवार के लिए सुरक्षित रखा जाता है। इसके लिए आमतौर पर शुरुआती collection fee और बाद में yearly storage fee देनी पड़ती है।
Cleveland Clinic के अनुसार, ज्यादातर बच्चों को भविष्य में अपने ही Cord Blood की जरूरत नहीं पड़ती। Private banking का फायदा खास तौर पर उन परिवारों में हो सकता है, जहां किसी भाई-बहन या परिवार के सदस्य को ऐसी बीमारी है जिसके इलाज में स्टेम सेल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
Cord Blood कैसे इकट्ठा किया जाता है?
डिलीवरी के बाद जब गर्भनाल को क्लैंप और काट दिया जाता है, तब स्वास्थ्यकर्मी गर्भनाल में एक सुई लगाकर खून को एक विशेष बैग में इकट्ठा करते हैं। Cleveland Clinic के मुताबिक यह प्रक्रिया कुछ मिनट में पूरी हो जाती है और इससे मां या बच्चे को नुकसान नहीं पहुंचता।
इसके बाद Cord Blood को बैंक में भेजा जाता है। वहां इसे प्रोसेस किया जाता है, बीमारी से जुड़ी जांच की जाती है और फिर उपयुक्त होने पर बेहद कम तापमान पर फ्रीज करके सुरक्षित रखा जाता है।
क्या डिलीवरी पर पड़ता है असर?
Cleveland Clinic के अनुसार Cord Blood Donate या Bank करने से डिलीवरी प्रभावित नहीं होती। सामान्य डिलीवरी और C-section, दोनों स्थितियों में Cord Blood को संग्रहित किया जा सकता है।
कब लेना होता है फैसला?
अगर माता-पिता Cord Blood Banking कराना चाहते हैं तो गर्भावस्था के दौरान ही इसकी तैयारी करना जरूरी है। Cleveland Clinic के अनुसार, करीब 34 सप्ताह की गर्भावस्था तक इस बारे में फैसला कर लेना बेहतर होता है। Consent form और स्वास्थ्य संबंधी जानकारी भी देनी पड़ सकती है।
कितना आता है खर्च?
Public Cord Blood Banking आम तौर पर मुफ्त हो सकती है, लेकिन यह सुविधा हर अस्पताल में उपलब्ध नहीं होती। वहीं Private Banking में collection के साथ-साथ सालाना storage fee भी लग सकती है। इसकी कीमत बैंक और उसकी शर्तों के अनुसार अलग-अलग होती है।
क्या हर बच्चे का Cord Blood Donate किया जा सकता है?
नहीं। Donation के लिए कुछ पात्रता नियम होते हैं। माता-पिता की उम्र, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, गर्भावस्था की स्थिति और कुछ संक्रमणों या उपचारों से जुड़ी जानकारी के आधार पर तय किया जा सकता है कि Cord Blood स्वीकार किया जाएगा या नहीं।
क्या Cord Blood Banking कराना जरूरी है?
यह हर परिवार के लिए जरूरी नहीं है। Cord Blood Banking एक व्यक्तिगत फैसला है। अगर परिवार में किसी सदस्य को ऐसी बीमारी है जिसमें स्टेम सेल ट्रांसप्लांट उपयोगी हो सकता है, तो Private Banking पर डॉक्टर से चर्चा की जा सकती है। वहीं Public Donation किसी जरूरतमंद मरीज के लिए उपयोगी हो सकता है।
किसी भी निर्णय से पहले अपने गायनेकोलॉजिस्ट या अन्य योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बात करना और बैंक की लागत, संग्रह प्रक्रिया, स्टोरेज और उपयोग की शर्तों को अच्छी तरह समझना जरूरी है।