अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा भूचाल आ गया है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के कार्यकाल के दौरान की एक गुप्त ऑडियो रिकॉर्डिंग हाल ही में लीक हुई है, जिसने व्हाइट हाउस के भीतर चल रहे गहरे मतभेदों को उजागर कर दिया है। इस रिकॉर्डिंग में रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने न सिर्फ ट्रंप की टैरिफ नीतियों पर गंभीर सवाल उठाए हैं, बल्कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को रोकने के लिए शीर्ष अधिकारियों पर सीधे आरोप भी लगाए हैं।
Axios की रिपोर्ट के अनुसार, यह 10 मिनट की ऑडियो क्लिप 2025 के शुरुआती दौर की है। यह रिकॉर्डिंग तब की बताई जा रही है, जब सीनेटर टेड क्रूज पार्टी के बड़े डोनर्स के साथ बंद कमरे में बातचीत कर रहे थे। इस बातचीत में क्रूज स्पष्ट रूप से खुद को मुक्त व्यापार का समर्थक बताते हैं और ट्रंप की टैरिफ नीति को लेकर गंभीर चिंता जाहिर करते हैं।
टेड क्रूज ने डोनर्स को आगाह किया कि ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि यह नीति लंबे समय तक जारी रही, तो इसका सीधा असर व्यापार, उद्योग और आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
भारत के साथ बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते के रुकने के मामले में, सीनेटर टेड क्रूज ने तीन प्रमुख लोगों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया। क्रूज ने व्हाइट हाउस के वरिष्ठ सलाहकार पीटर नवारो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस पर आरोप लगाया कि वे इस डील को आगे बढ़ने से लगातार रोक रहे थे। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामलों में खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इस समझौते को आगे बढ़ाने में बाधा बने।
टेड क्रूज ने ट्रंप के साथ हुई एक तीखी मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 में टैरिफ लागू होने पर जब उन्होंने और कुछ अन्य सीनेटरों ने राष्ट्रपति से मिलकर दोबारा विचार करने की सलाह दी, तो ट्रंप बेहद नाराज थे। क्रूज के मुताबिक, ट्रंप ने उन पर चिल्लाया और अपशब्दों का इस्तेमाल किया, और यह ट्रंप के साथ उनकी सबसे खराब बैठकों में से एक थी।
ऑडियो लीक में सबसे ज्यादा चर्चा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को लेकर टेड क्रूज की टिप्पणी की हो रही है। क्रूज ने वेंस को कंजरवेटिव पॉडकास्टर टकर कार्लसन का “चेला” बताया। क्रूज का आरोप है कि टकर कार्लसन की यहूदी-विरोधी सोच और इज़रायल-विरोधी विदेश नीति का प्रभाव वेंस पर साफ दिखता है, और “टकर ने जेडी को बनाया है।”
यह अंदरूनी कलह दर्शाती है कि टैरिफ और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार संबंधों, खासकर भारत के साथ डील को लेकर, ट्रंप प्रशासन के भीतर गंभीर मतभेद थे। इन खुलासों से आने वाले दिनों में अमेरिकी राजनीति में और हलचल देखने को मिल सकती है।









